सुरेंद्र दुबे शास्त्री, जबलपुर। अगर आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं और मोबाइल चार्ज करने के लिए पावर बैंक की जरूरत पड़ रही है या आपका बच्‍चा बैटरी वाले खिलौने के लिए मचल रहा है तो तो ट्रेन के वेंडर से इन्‍हें खरीदते समय सावधानी बरतें। ऐसे पावर बैंक या बैटरी से चलने वाले खिलौने नकली हो सकते हैं। ऐसा ही एक मामला जबलपुर में पकड़ा गया है। वेंडर जो पावर बैंक बेच रहा था, उसमें गीली मिट्टी भरी हुई थी। पावर बैंक ग्राहक के सामने चल सके, इसके लिए उसमें खिलौने वाली बैटरी लगाई गई थी। ग्राहक ने ऐसे पावर बैंक को खरीद तो लिया लेकिन थोड़ी देर चलने के बाद पावर बैंक ने काम करना बंद कर दिया तो उसे शक हुआ। इसकी शिकायत करने पर आरपीएफ ने जब उस वेंडर को पकड़ा तो इसका खुलासा हुआ। वह बैटरी से चलने वाले नकली खिलौने भी बेचा करता था। उसे यह सामान ट्रेन में ऐसे सामान बेचने का ठेका लेने वाली कंपनी से मिलता था। आरपीएफ को आशंका है कि ऐसा संगठित गिरोह देशभर में सक्रिय हो सकता है। पावर बैंक बेचने वाले व्‍यापारियों ने कहना है कि पावर बैंक खरीदते समय यात्रियों-उपभोक्‍ता को सावधानी रखना चाहिए।

इलेक्ट्रानिक उपकरणों के जानकार ने बताया कि वर्तमान में तकनीकी में क्रांति आ गई है। जिसकी जानकारी रखने वाले थोड़े से पैसों के लालच में लगभग हर इलेक्ट्रानिक उपकरण को नकली सामान का इस्तेमाल कर हूबहू असली जैसा बना लेते हैं। कौन सा उपकरण असली है और कौन सा नकली, लोग यह भी पहचान नहीं पाते। नकली बैटरी या पावर बैंक चार्ज करने या इस्तेमाल करते समय कभी भी फट सकते हैं जबकि ब्रांडेड कंपनी के उपकरण में ऐसा नहीं होता। नकली उपकरण बेचने वाले ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों की जल्दबाजी का फायदा उठाते है और उन्हें सामान की जांच-परख करने का मौका नहीं देते। कम समय में नकली माल असली बताकर बेचते हैं और आगे बढ़ जाते है।

इस तरह से बनते हैं नकली पावर बैंक-

- पावर बैंक व चार्जर का वजन बढ़ाने उसमें गीली मिट्टी भरी जाती है।

- बच्चों के खिलौनों में लगने वाली बैटरी का उपयोग करते हैं।

- ऐसी बैटरी से सिर्फ दो से तीन मिनट तक ही माेबाइल चार्ज हो सकता है।

-इसी तरह के हथकंडे बैटरी से चलने वाले खिलौने बनाने में भी अपनाए जाते हैं।

यह बरतें सावधानी-

- ट्रेनों में कोई भी सामान खरीदने के पहले उसकी अच्छे से जांच कर लें।

- पावर बैंक, बैटरी, बैटरी से चलने वाले खिलौने, घड़ी, टार्च आदि पूरी सावधानी से

जांच-परख कर ही खरीदें।

- सामान लेने से पहले वेंडरों का पहचान पत्र अवश्य देखें और हो सके तो उसकी फोटो भी खींच लें।

- संदेह होने पर तत्कार जीआरपी, आरपीएफ या टीटीई को सूचना दें।

यह है मामला-

जबलपुर-मानिकपुर के बीच वेंडरों द्वारा नकली इलेक्ट्रानिक सामान बेचने की सूचना पर सतना आरपीएफ प्रभारी बब्बन लाल व टीम ने जबलपुर की फर्म पीके मार्केटिंग के वैध वैंडर रामबाबू को पकड़ा था, जिसके पास मिट्टी भरे और बच्चों के खिलौने में लगने वाली बैटरी लगे कई पावर बैंक जब्त किए गए हैं।

चेक करके ही खरीदें इलेक्ट्रानिक सामान

सस्ते के चक्कर में ट्रेन में कोई भी इलेक्ट्रानिक सामान पूरी तरह चेक करके ही खरीदें। वह नकली हो सकता है और खरीददार को जानमाल की हानि हो सकती है। -दीपक सेठी, अध्यक्ष जबलपुर मोबाइल एंड टेली कम्युनिकेशन एसोसिएशन

ट्रेनों में सामान बेचने वाले वेंडरों की लगातार चैकिंग की जा रही है। नकली सामान बेचने वालों पर लगातार कार्रवाई होगी। यात्री भी जागरूक हों और संदिग्ध लगने वाले वेंडरों की सूचना दें, जिससे उन पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।-अरुण त्रिपाठी, सीनियर डीएससी

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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