जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मदन महल-दमोहनाका के बीच बन रहे फ्लाईओवर के बीच दो बो स्टिंग ब्रिज बनाए जा रहे हैं। इस ब्रिज की लंबाई 70 मीटर से अधिक होगी, ताकि इसके नीचे से आसानी से बिना बाधा के यातायात गुजरता रहे।

कहां लगेगा-

रानीताल चौक पर 70-70 मीटर लंबे दो बो स्टिंग ब्रिज बनाए जाने हैं। लोक निर्माण विभाग ने यहां यातायात के भारी दबाव की वजह से इतने लंबे बिना पिलर वाले ब्रिज तैयार करवाए हैं, ताकि वाहन चालकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा बल्देवाग में एक 70 मीटर लंबा बो स्टिंग ब्रिज बनाया जाएगा। शुरुआत रानीताल से की जा रही है, जहां ब्रिज के लिए लोहे का स्ट्रक्चर रखा जा रहा है।

विशेषता-

पूरी तरह से स्टील के बने इस ब्रिज की क्षमता करीब 70 टन भार झेलने की होगी। ब्रिज का ढांचा हैदराबाद से तैयार करवाया गया है। अलग-अलग हिस्सों में इसे निर्माण स्थल तक पहुंचाया गया है।

लागत-

फ्लाईओवर की कुल लंबाई 5.9 किलोमीटर है। इसकी लागत 767 करोड़ रुपये है। दमोहनाका में अतिरिक्त निर्माण के लिए 78 करोड़ रुपये अलग है।

कब तक तैयार-

बो-स्टिंग ब्रिज का निर्माण में करीब एक माह का वक्त लगेगा। इसके पश्चात फ्लाईओवर निर्माण का पूरा कार्य अगस्त 2023 तक निर्धारित किया गया है।

सड़क सकरी, धूल से परेशानी-

ईओवर निर्माण के दौरान आम लोग ठेकेदार की लापवाही के कारण परेशान है। दमोहनाका से रानीताल आने-जाने वाला हर कोई सड़क की दुर्दशा से पीड़ित है। खुदी सड़क में उड़ती धूल लोगों की मुश्किल बढ़ा रहा है। लोगों की परेशानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं हो रही है गोलबाजार का पूरा इलाका ही खुदा पड़ा हुआ है। जहां निकलने के लिए भी ठेकेदार ने पर्याप्त जगह नहीं छोड़ी है। यहां जगह-जगह सीवर लाइन और नालियां बनाई जा रही है जिस वजह से खुदाई का हो रहा था। मिट्टी से सड़क पट चुकी है नतीजा वाहन जब इस पर चल रहे हैं तो धूल उड़ती है। यहां से निकलने वाले के शरीर पर धूल की परत चढ़ जाती है। जबकि ठेकेदार को शर्तो के तहत निर्माण के दौरान यातायात को निर्बाध रखना है। इस दौरान किसी तरह भी लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। वाहनों के लिए पर्याप्त वैकल्पिक मार्ग बनाया जाए।कुछ घंटों के अंतराल में धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव किया जाना है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इधर रानीताल से दमोहनाका की तरफ बन रहे फ्लाईओवर में भी पानी का छिड़काव नहीं होने के कारण धूल से लोग परेशान है।सड़क गड्डों में बदल चुकी है। सड़क में जगह-जगह गड्डे खुदे हुए है जिन्हें मिट्टी,मुरूम से भरकर खानापूर्ति की जा रही है। जैसे ही मिट्टी वाहनों के गुजरने से सूखकर उड़ती है तो वाहन चालकों की आंखों में तकलीफ शुरू हो जाती है। कई बार तो एकाएक आंख में धूल के कण पहुंचने से वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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