अतुल शुक्ला, जबलपुर। पैसेंजर ट्रेनों को पटरी पर सुरक्षित दौड़ाने के लिए रेलवे द्वारा उठाए गए कदमों के बेहतर परिणाम सामने आए, लेकिन दूसरी ओर रेलवे द्वारा माल ढुलाई में उपयोग की जा रही मालगाड़ियों की रफ्तार, ब्रेक और सिग्नल धोखा दे रहे हैं। हाल ही में जबलपुर रेल मंडल और इसकी सीमा से लगे अन्य रेलवे जोन में हुए हादसों ने एक बार फिर रेलवे को मालगाड़ियों के ब्रेक सिस्टम और सुरक्षा मापदंड पर मंथन करने विवश कर दिया है।

रेलवे द्वारा उपयोग किए जा रहे निजी कंपनी के रैक में ब्रेक न लगने की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। वहीं रेलवे की अन्य मालगाड़ियों में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें ड्राइवर द्वारा ब्रेक लगाने के बाद भी रैक, सिग्नल से आगे बढ़ गया है। इधर हाल ही में ओडिशा के जाजपुर जिले में रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी, प्लेटफार्म पर चढ़ गई, जिससे तीन यात्रियों की मौके पर मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर मालगाड़ी की रफ्तार, ब्रेक और संरक्षा जैसे पहलुओं की समीक्षा शुरू कर दी है।

इन मामलों से बढ़ाया रेलवे का तनाव

पहला मामला जबलपुर रेल मंडल के कटनी-सागर रेल लाइन के रतनगांव के पास मालगाड़ी का ब्रेक नहीं लगा और रैक, सिग्नल पार कर गई। वहीं दूसरा मामला कुछ माह पूर्व सालीचौका रेलवे स्टेशन के पास रेलवे की पार्सल वैन के इंजन में सिग्नल क्रास कर गई। इसकी वजह ड्राइवर को झपकी आना बताया गया, लेकिन सूत्र बताते हैं कि इसमें भी समय पर ब्रेक न लगना रहा। तीसरा मामला जबलपुर मंडल से लगे नागपुर रेल मंडल में नागपुर से इटारसी आ रही मालगाड़ी का ब्रेक न लगने के वह हादसे का शिकार हो गई।

आरडीएसओ की मिली थी खामी-

हाल ही में निजी कंपनी की मालगाड़ी में ब्रेक फेल होने के मामले सामने आने के बाद जबलपुर रेल मंडल ने इसकी जांच कराई। इस दौरान लखनऊ से आइ रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंड्ड ऑर्गनाइजेशन यानि आरडीएसओ ने इसकी जांच की, जिसमें पता चला कि इंजन से बोगी को जोड़ने वाले ब्रेक पाइप में प्रेशर रिलीज के दौरान तकनीकी खामी आ रही है। निजी रैक में लगे ब्रेक को तकनीकी तौर पर बदला गया है, जिससे ब्रेक के दौरान बनने वाले दबाव में खामी दिखी। यही वजह है कि कई बार ब्रेक लगता है तो कई बार नहीं। हालांकि इसके बाद रेलवे ने ट्रेन की औसत गति को 60 से घटाकर 50 कर दिया है।

बीएमबीएस में आ रही परेशानी

जबलपुर रेल मजदूर संघ के सचिव और ड्राइवर डीपी अग्रवाल बताते हैं कि इन दिनों रेलवे कई मालगाड़ियों में बोगी माउंटेन ब्रेक सिस्टम यानि बीएमबीएस का उपयोग कर रहा है। इनमें यह देखा गया है कि इंजन ड्राइवर द्वारा ब्रेक लगाने के लिए तय सीमा में रिलीज किया गया ब्रेक नहीं लग रहा। कई बार ज्यादा प्रेशर रिलीज करना पड़ता है। इस कई खामियां मिली हैं। पहले ब्रेक बोगियों में लगी ट्राली के बीच में लगाए जाते थे, लेकिन इस सिस्टम को ट्राली पर लगाया गया है। वहीं ब्रेक सिस्टम में पहले मैकेनिकल चिप का उपयोग होता था, लेकिन अब इलेक्ट्रोनिक चिप उपयोग हो रही है, जिसमें कई बार सेंसर काम नहीं करते ।

नोर कंपनी के ब्रेक में ज्यादा दिक्कत

निजी कंपनी के रैक को रोकने में जिस ब्रेक सिस्टम का उपयोग किया जाता है, उसमें तकनीक खामियां कई हैं। वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन के मंडल अध्यक्ष बीएन शुक्ला बताते हैं कि ब्रेक पूरी तरह से दो पाइप और उसमें बनने वाले प्रेशर पर काम करता है, लेकिन निजी मालगाड़ी में ब्रेक लगाने के लिए जो प्रेशर रिलीज किया जाता है, उस पर ब्रेक काम नहीं कर रहे। मुख्यत: .5 से लेकर 5 किलो तक प्रेशर रिलीज होता है, लेकिन .5 से 1.5 के बीच मालगाड़ी को आसानी से ब्रेक लगाकर रोका जाता है, लेकिन निजी रैक में एनओआर ब्रेक में इससे अधिक प्रेशर देने के बाद भी ब्रेक काम नहीं करते। इसका खामियाजा ड्राइवर और रेलवे, दोनों को भुगतना पड़ता है।

क्या आ रही परेशानी

- कई मालगाड़ी के रैक को रोकने के लिए तय सीमा पर ब्रेक लगाने के बाद भी वह सिग्नल पर नहीं रूकते।

- यह भी घटना सामने आइ है कि ड्राइवर द्वारा ब्रेक लगाने के बाद भी मालगाड़ी कई किलोमीटर तक आगे चली गई।

- ऐसे घटनाओं में स्टेशन मास्टर को रेलवे ट्रैक क्लीयर कर मालगाड़ी को अगले स्टेशन पर रोका गया।

- इन घटनाओं से मालगाड़ी के ड्राइवरों का तनाव बढ़ गया है और उनमें आत्मविश्वास की कमी आई है।

- रेल यूनियनों ने इसका विरोध कर जोन जीएम और डीआरएम से भी इसका समाधान करने की मांग की।

यह उठाए गए कदम

- निजी रैक में आ रही ब्रेक की दिक्कत के बाद रेलवे ने गाइडलाइन जारी की

- इनकी औसत गति को कम करते हुए मालगाड़ी चलाने के निर्देश दिए गए

- ड्राइवर को मालगाड़ी ले जाने से पहले ब्रेक की जांच अवाश्यक की गई

- कई सिग्नल पर कैमरे लगा गए हैं और लगातार ड्राइवर से संपर्क रखा जा रहा है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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