जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर की सड़कों में स्पीड ब्रेकर बनाने की परंपरा खत्म ही नहीं हो रही है। हाल ही में जो सड़कें बनी हैं उनमें भी बड़े-बड़े स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं। पुरानी सड़कों में तो पहले ही बने बेढंगे स्पीड ब्रेकर वाहन चालकों के कंधों और कमर को चोटिल कर रहे हैं। ट्रैफिक इंजीनियरिंग को दरकिनार कर यह स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं जो एक फीट तक की ऊंचाई के हैं। जिससे वाहन भी डैमेज हो रहे हैं।

आदर्श ऊंचाई नियमों को पालन नहीं: शहर की मुख्य सड़कों से लेकर गली मोहल्लों की सड़कों में भी आदर्श ऊंचाई नियमों को दरकिनार कर लोगों ने अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार ऊंचे-ऊंचे ब्रेकर बनवा लिए हैं। अब तो नगर निगम भी इसी ढर्रे पर चल पड़ा है। हाल ही में मानस भवन से लेकर डुमना एयरपोर्ट तक बीच-बीच में बनी सड़कें इसका उदाहरण हैं। यहां भी बड़े-बड़े स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं, जिसके कारण वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी हो रही है।

बहक रहे वाहन, दिव्यांगों की मुसीबत : ब्रेकर से भरी सड़कों पर दो पहिया, चार पहिया वाहन चालक को तो परेशानी हो ही रहे हैं, साथ ही ट्राइसाइकिल पर चलने वाले दिव्यांग भी रोजाना मुसीबत झेल रहे है । ब्रेकर पर ट्राइसाइकिल अटक जाती है। वाहन भी बहक कर नियंत्रण खो रहे हैं जिससे दुर्घटनाएं हो रही हैं।

ये है आदर्श स्पीड ब्रेकर के नियम:

- आदर्श स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई 10 सेंटीमीटर

- 3.5 मीटर व वृत्ताकार क्षेत्र 17 मीटर

- वाहन चालकों को सचेत करने के लिए 40 मीटर पहले चेतावनी बोर्ड जरूरी।

- थर्मोप्लास्टिक पेंट से पट्टियां बनाई जानी चाहिए, रात में भी नजर आएं

Posted By: Sunil Dahiya

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