जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण, एनजीटी में विचाराधीन बक्सवाहा मामले में यू-टर्न आ गया है। ऑर्कियोलाॅजी विभाग ने पूर्व निर्देश के पालन में अपनी रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें साफ किया गया है कि बक्सवाहा जंगल के रॉक पेंटिंग पाषाण युग से संबंधित हैं।

जनहित याचिकाकर्ता नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर के प्रांताध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे ने बताया कि ऑर्कियोलॉजी विभाग ने बक्सवाहा जंगल में सर्वे कर पाया है कि यहां पर तीन बड़ी रॉक पेंटिंग व अति प्राचीन मूर्तियां हैं, जो कि पुरातात्विक महत्व की हैं। इनसे साफ हुआ है कि इस क्षेत्र का जुड़ाव मानव रहवास से आदिकालीन रहा है। ऑर्कियोलॉजी विभाग, जबलपुर सर्कल ने इस आशय की रिपोर्ट जनहित याचिकाकर्ता के अधिवक्ता एडवोकेट प्रभात यादव को भेज दी है।

इसके मुताबिक मानव इतिहास से पूर्व अर्थात प्री-हिस्टोरिक दृष्टि से यह स्थान बेहद अहम है। जिस तरह घिमरखुआ में प्राच्य से जुड़ाव रखने वाली बेशकीमती चीजें पाई गई थीं, वैसे ही यहां भी तीन चीजें पाई गई हैं। पहली रॉक पेंटिंग अस्पष्ट है, जो कि लाल रंग से बनाई गई थी। दूसरी जगह पर कुछ रॉक पेंटिंग पाषाण युग के मध्यकाल से संबंधित हैं। इनका सृजन लाल रंग व चारकोल से हुआ था। तीसरी रॉक पेंटिंग मानव इतिहास से जुड़ी है, इसे लाल रंग से बनाया गया है, इसमें युद्ध का दृश्य दर्शाया गया है।

नयागांव, जबलपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ.रजत भार्गव ने बताया कि ऑर्कियोलॉजी विभाग के सर्वे में पेंटिंग के अलावा कुशमार गांव में सती पाषाण मूर्ति भी मिली है। इसी गांव में खेरमाता प्लेटफार्म में काफी संख्या में श्रीगणेश प्रतिमाएं, श्री हनुमान मूर्तियां व अन्य प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं। ऑर्कियोलॉजी विभाग ने डॉ.सुजीत नयन के नेतृत्व में अपना सर्वे 10 जुलाई से 12 जुलाई के बीच किया है।

Posted By: Ravindra Suhane

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