अतुल शुक्ला, जबलपुर। जबलपुर रेल मंडल की सीमा में बिछाई जा रहीं नई रेल लाइन का काम इन दिनों धीमा पड़ गया है तो कई जगहों पर काम ही बंद कर दिया गया है। हालात इतने बुरे हैं कि जैसे ही पश्चिम मध्य रेलवे नई रेल लाइन बिछाने का काम शुरू करता है, वहां सैकड़ों की संख्या में युवा पहुंचकर रेलवे का काम बंद करवा देते हैं। इन दिनों सबसे ज्यादा काम ललितपुर-सिंगरौली के बीच बन रही नई रेल लाइन का प्रभावित हो रहा है। यहां पर कई स्टेशनों पर पिछले कई दिनों से काम बंद है तो कई जगह पर मजदूरों को काम ही नहीं करने दिया जा रहा है।

इसकी मुख्य वजह रेलवे की नौकरी न मिलने वाले उम्मीदवारों की नाराजगी है। पश्चिम मध्य रेलवे ने नई लाइन बिछाने के लिए हजारों किसानों की जमीन अधिग्रहण की और उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया। यहां तक की नौकरी के लिए चयनित उम्मीवारों को मेडिकल तक ले लिया, लेकिन अब पमरे ने इन उम्मीदवारों को नौकरी देने से मना कर दिया है।

पन्ना-सतना नई रेल लाइन का काम कई दिनों रहा बंद-

पन्ना से सतना के बीच आने वाले अधिकतर नई रेलवे स्टेशन पर पटरियां बिछाने का काम चल रहा है। इनमें सकरिया, फुलवारी, इटमा, नौनिया, नागौद, करही रेलवे स्टेशन पर पिछले दिनों रेलवे का काम उम्मीदवारों ने बंद करवा दिया। यहां पर मजदूरों को मौके से भगाया तो वहीं रेल अधिकारियों के सामने विरोध कर उन्हें काम करने से मना कर दिया। इतना ही नहीं कई रेल स्टेशनों के बीच काम नहीं हो पा रहा है। उम्मीदवारों ने रेलवे के खिलाफ अपना विरोध बढ़ा दिया है।

पन्ना से खजुराहों का काम शुरू ही नहीं कर रहे अधिकारी

रेलवे के वादे के बाद भी नौकरी न मिलने से नाराज उम्मीदवारों ने कई क्षेत्रों में रेल लाइन का काम करने से रेलवे को राेक दिया है। इस वजह से पश्चिम मध्य रेलवे और जबलपुर रेल मंडल कई रेल लाइन पर काम करने से डर रहे हैं। हालात यह है कि पन्ना से सतना नई रेल लाइन का काम बंद कराने के बाद पन्ना से खजुराहों तक बिछाने वाली नई रेल लाइन का काम अभी तक शुरू ही नहीं किया गया है। अधिकांश काम अपने तय समय से लेट हो गया है।

सुलह के लिए रेलवे ने मांगी प्रशासन से मदद

पन्ना से सतना के बीच नई रेल लाइन बिछाने के अलावा ब्रिज और अर्थवर्क का निर्माण किया जा रहा है। रेलवे से नाराज उम्मीदवारों ने यहां के स्थानीय प्रशासन को पहले ज्ञापन दिया और फिर ये काम भी बंद करवा दिया। कई जगह प्रशासन ने उम्मीदवारों की बात को नजरअंदाज कर दिया तो बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के साथ ग्रामीणजन मौके पर पहुंचे और काम बंद करवाकर मशीनें वहां से हटा दीं। उम्मीदवारों ने रेलवे प्रशासन से कहा है कि जब तक वे उन्हें नौकरी देने का वादा पूरा नहीं करते, काम नहीं होने दिया जाएगा। यह जमीन उनकी है, जो रेलवे ने उनसे धोखे में ली है।

क्या है पूरा मामला

रेलवे ने नोटीफिकेशन जारी कर 11 नवंबर 2019 के बाद जमीन के बदले नौकरी देने का निर्णय वापस ले लिया। इससे पूर्व अधिग्रहण की गई जमीन के मालिकों के उम्मीदवारों को नौकरी दी जानी थी। पश्चिम मध्य रेलवे ने इन उम्मीदवारों को नौकरी देने की प्रक्रिया कर दस्तावेजों की जांच से लेकर इनका मेडिकल तक करा लिया। 2700 उम्मीवारों में से सिर्फ 100 को ही नौकरी दी गई। शेष उम्मीदवारों को कोरोना काल का हवाला देकर प्रक्रिया को बीच में रोक दिया गया। बड़े स्तर पर विरोध हुआ तो 1264 को नौकरी देने संबंधित आदेश जारी किए, लेकिन सिर्फ 100 को नौकरी देने के बाद प्रक्रिया फिर रोक दी गई।

इसलिए बढ़ी और नाराजगी

- उम्मीदवारों ने पश्चिम मध्य रेलवे कार्यालय के बाहर चार दिन तक प्रदर्शन किया

- इस दौरान जोन के महाप्रबंधक उनसे मिलने तक नहीं आए और न ही कोई आश्वासन दिया

- सीधी सांसद रीती पाठक ने भी महाप्रबंधक से मुलाकात की, लेकिन समाधान नहीं निकला

- बारिश के दौरान पुरुष और महिला अपने छोटे बच्चों के साथ प्रदर्शन करती रहीं।

- इन्हें आश्वासन देने की बजाय आरपीएफ और जीआरपी ने टेंट तक लगाने नहीं दिया।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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