जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की जबलपुर बेंच ने ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज के सात सौ कर्मियों की आसन्न नगरीय निकाय चुनाव में ड्यूटी लगाने का आदेश स्थगित करने से इनकार कर दिया। कैट के न्यायिक सदस्य रमेश सिंह ठाकुर की बेंच ने रक्षा उत्पादन मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अगली सुनवाई 25 जुलाई को निर्धारित की गई है।

इंडियन आर्डनेंस फैक्ट्रीज गजटेड आफिसर्स एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष बीबी ओझा ने यह याचिका दायर की गई, जिसमें कहा गया कि संविधान के प्रविधानों के तहत चुनाव ड्यूटी के लिए केवल राज्य सरकार के कर्मियों को ही तैनात किया जाता है। याचिकाकर्ता कर्मी डिफेन्स एसेंशियल सर्विसेज एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्यरत हैं। इस एक्ट के तहत कार्यरत कर्मियों की सेवाओं का अन्यत्र उपयोग नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे रक्षा उत्पादन प्रभावित होता है।

अधिवक्ता आकाश चौधरी ने तर्क दिया कि इसके बावजूद आयुध निर्माणियों में कार्यरत सात सौ कर्मियों की चुनाव ड्यूटी लगाने का आदेश 11 जून, 2022 को जारी कर दिया गया। यह अवैध और अनुचित है। लिहाजा, इस पर रोक लगाई जाए। चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने तर्क दिया कि उक्त चुनावों की अधिसूचना जारी की जा चुकी है। 26 जून से चुनाव होने हैं। लिहाजा, इसमें हस्तक्षेप उचित नहीं होगा। प्रारम्भिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने चुनाव ड्यूटी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट से एमबीबीएस स्टूडेंट्स को झटका :

हाई कोर्ट ने एमबीबीएस स्टूडेंट्स को झटका देते हुए उनकी वह याचिका निरस्त कर दी, जिसके जरिये मेडिकल साइंस यूनिवसिर्टी, जबलपुर पर उत्तर-पुस्तिका मूल्यांकन में धांधली का आरोप लगाया गया था।मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता एमबीबीएस स्टूडेंट्स सुधाकर केवट व राघवेंद्र सिंह सहित अन्य की ओर से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि मेडिकल साइंस यूनिवसिर्टी में उत्तर-पुस्तिका मूल्यांकन में धांधली हुई है।

लिहाजा, नए सिरे से जांच आवश्यक है। मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा व लावण्या वर्मा ने इन आरोपों को अनुचित करार दिया। उन्होंने दलील दी कि नियमानुसार उत्तर-पुस्तिकाओं की आनलाइन जांच होती है। इस प्रक्रिया में किसी तरह के भौतिक दखल की कोई गुंजाइश नहीं होती है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायदृष्टांतों के मुताबिक यह याचिका निरस्त किए जाने योग्य है, ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें एक बार हो चुके परीक्षण पर संदेह जाहिर करते हुए नए सिरे से परीक्षण पर बल दिया गया है। मेडिकल साइंस यूनिवसिर्टी में दोबारा अंक गणना या पुनर्मूल्यांकन का प्रविधान नहीं है।ऐसे में नए सिरे से एक्सर्ट से जांच की मांग बेमानी है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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