जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट में याचिका के जरिये जिला, जनपद और ग्राम पंचायत चुनाव में आरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना व मनमाने प्रविधानों को चुनौती दी गई है। मामले पर मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। कोर्ट ने नौ नवम्बर को अन्य याचिकाओं के साथ इस मामले की भी सुनवाई की व्यवस्था दे दी।

इस मामले में पूर्व में अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव, पंचायत राज संचालनालय के आयुक्त सह संचालक सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर की ओर से दायर याचिका में पंचायत चुनाव कराने को लेकर वर्षगत आधार पर चुनौती दी गई है। वहीं पुरानी याचिकाओं में कहा गया है कि राज्य सरकार ने 21 नवंबर 2021 को अधिसूचना जारी कर आगामी पंचायत चुनाव में 2014 के आरक्षण रोस्टर के आधार पर चुनाव कराए जाने की घोषणा की है। इसके पहले 2019-20 में पंचायत चुनाव का आरक्षण निर्धारित कर दिया गया है।

सिंगरौली के देवसर निवासी लल्ला प्रसाद वैश्य ने याचिका दायर कर उक्त अधिसूचना को चुनौती दी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ब्रहमेन्द्र पाठक ने दलील दी कि सरकार ने 2019-20 का पंचायत चुनाव का रोस्टर निरस्त किए बिना ही नई अधिसूचना जारी कर दी है, जोकि अवैधानिक है। अब नई अधिसूचना के कारण इन पंचायतों का आरक्षण रोस्टर पुन: बदल जाएगा। याचिका मे मांग की गई है कि या तो राज्य सरकार की अधिसूचना को निरस्त किया जाए अथवा नए सिरे से आरक्षण निर्धारित किया जाए। राज्य शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अवगत कराया कि इस मामले में अन्य याचिकाएं भी लंबित हैं। कोर्ट ने सभी याचिकाओं की अगली सुनवाई एक साथ नौ दिसंबर को निर्धारित की है।

Posted By: Ravindra Suhane

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