जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की डिप्टी रजिस्ट्रार ने डॉक्टर पर अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला गढ़ा थाने में दर्ज कराया है। वहीं डॉक्टर ने मामले को झूठा बताते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार पर ही गंभीर आरोप लगाए है।

डिप्टी रजिस्ट्रार ने लगाए ये है आरोप: पुलिस ने बताया कि मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की डिप्टी रजिस्ट्रार तृप्ति गुप्ता ने गुरुवार को थाने में शिकायत दर्ज कराई कि 7 अप्रैल की दोपहर लगभग सवा 2 बजे विश्वविद्यालय के कुलपति के कक्ष में डीन फैक्ल्टी से संबंधित फाइल लेकर बुलाया था। जब वह कुलपति कक्ष में पहुंची, तो कक्ष में पहले से ही डॉ शुभम जैन उपस्थित थे। कक्ष में पहुंचने के बाद जब कुलपति ने फाइल मांगी, तभी वहां उपस्थित डॉ शुभम जैन ने उनके साथ अभद्रता करते हुए फाइल ले ली और उसकी अपने मोबाइल से फोटो खींचने लगा। यह देखकर उन्होंने डॉ शुभम को ऐसा करने से मना किया साथ ही कहा कि यह शासकीय गोपनीय दस्तावेज है। इसकी फोटो नहीं खींच सकते। जिसके बाद डॉ शुभम ने उनके साथ गालीगलौज करते हुए उनको और उनके स्वजन को जान से मारने की धमकी दी।

डॉक्टर का कहना कक्ष से बाहर करवा दिया: वहीं डॉ शुभम जैन ने आरोप लगाया कि वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् में छात्रनेता है और शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय से बीएएमएस की ड्रिगी प्राप्त कर चिकित्सक है। लंबे समय से वह छात्रहित को ध्यान में रखते हुए शासकीय आयुविज्ञान विवि में प्याप्त अनिमित्ताओं के सदर्भ में प्रदर्शन ज्ञापन कर लगातार व्यवस्थाओं में सुधार के लिए प्रयासरत है। इसी बारे में उसने सूचना के अधिकार के तहत मुझे यह जानकारी मिली कि विवि में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त और वर्तमान में प्रभारी परीक्षा नियंत्रक डॉ तृप्ति गुप्ता और नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के बायोकैमिस्ट्री विभाग के विभागध्यक्ष के पद पर पदस्थ उनके पति डॉ अशोक साहू की नियुक्ति पूर्णत अवैध है। जब यह जानकारी मिली, तो इस बारे में चर्चा करने के लिए कुलपति के कक्ष में गया था।

गार्ड से कहकर उन्हें कक्ष से बाहर भिजवा दिया: कुलपति से चर्चा के दौरान आयुष संकाय की प्राध्यापक वरिष्ठता सूची की मांग की। जिसके बाद कुलपति ने भृत्य से सूची लाने के लिए कहा। लेकिन वह सूची डॉ तृप्ति गुप्ता और उनके पति अशोक पहुंचे। जैसे ही उसने वह सूची कुलपति के हाथ से देखने के लिए ली, तभी डॉ गुप्ता नाराज हो गई और उनके हाथ से सूची छींनकर अभद्रता करते हुए गार्ड से कहकर उन्हें कक्ष से बाहर भिजवा दिया। मामले की शिकायत कुलसचिव को दी। इसके बाद पता चला कि डॉ गुप्ता ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया है। जबकि यह झूठी शिकायत की गई है। मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

Posted By: Sunil Dahiya

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