जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि। Coronavirus Jabalpur News : रविन्द्र नगर अधारताल निवासी वृद्घ, आरपीएसएफ के जवान, स्व. शायदा बेगम, विजय नगर निवासी युवती ये कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें कोरोना का संक्रमण किन लोगों से मिला अब तक अबूझ पहेली बना हुआ है। इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए कांटेक्ट ट्रेसिंग का सहारा लिया जा रहा है। दरअसल, कांटेक्ट ट्रेसिंग के जरिए कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम की कवायद की जा रही है, लेकिन लगातार ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं जो किन लोगों के संपर्क में आकर संक्रमित हुए इसका पता लगाने की सारी कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं।

संपर्कों की पहचान कर बनाते हैं सूची

बताया जाता है कि कांटेक्ट ट्रेसिंग में कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्कों का पता लगाया जाता है। बीते दिनों में मरीज कहां गया था, किन लोगों से मिला था उन्हें सूचीबद्घ किया जाता है। साथ ही यह पता लगाया जाता है कि कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में कितने लोग आ चुके हैं। सभी की सेहत पर सतत नजर रखी जाती है। आवश्यकता के अनुसार सभी को होम या संस्थागत क्वारंटाइन में रखा जाता है।

केस-1

संपर्क में आए लोगों का पता लगाया, उपचार किया

प्रदेश के पहले 4 कोरोना मरीज जबलपुर में मिले थे। लार्डगंज क्षेत्र निवासी तीन मरीज एक ही परिवार के तथा चौथा सिविल लाइन क्षेत्र का निवासी था। कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट सामने आते ही मेडिकल कॉलेज अस्पताल सामुदायिक चिकित्सा विभाग की टीम कांटेक्ट ट्रेसिंग में जुट गई। लिहाजा दुकान में आने जाने वालों समेत वहां के कर्मचारियों को चि-ति कर क्वारंटाइन किया जाने लगा। दर्जनभर लोगों में कोरोना का पता तो चला लेकिन समय रहते उनकी पहचान कर ली गई।

केस-2

संपर्क वाले मिले, संक्रमण के स्रोत का पता नहीं

हाल ही में रविन्द्र नगर अधारताल में कोरोना संक्रमित मिले वृद्घ व आरपीएसएफ जवान के कोरोना पॉजिटिव मिलते ही उनके संपर्क में आए लोगों की कांटेक्ट ट्रेसिंग तेज कर दी गई। संपर्क में आए लोगों को क्वारंटाइन कर सैंपल जांच के लिए भेजे गए। वृद्घ की नातिन व बहू तथा जवान के संपर्क में आए तीन अन्य जवान कोरोना पॉजिटिव मिले लेकिन अब तक दोनों में कोरोना संक्रमण के स्रोत का पता नहीं चल पाया है।

केस-3

दो से दर्जनों मरीज, स्रोत का पता नहीं चल पाया

कोतवाली क्षेत्र निवासी दो परिवार के 35 से ज्यादा सदस्य कोरोना वायरस से संक्रमित मिले थे। दोनों परिवारों में मिले कोरोना के पहले मरीजों के बाद कांटेक्ट ट्रेसिंग पर जोर दिया गया। जिसके बाद संपर्क में आए लोगों को होम व संस्थागत क्वारंटाइन कर सैंपल लिए गए। हालांकि स्वास्थ्य विभाग अब तक यह नहीं बता पाया है कि दोनों परिवारों में कोरोना वायरस का संक्रमण पहुंचाने की वजह कौन रहा।

इनका कहना है

किसी भी महामारी की रोकथाम में कांटेक्ट ट्रेसिंग की बहुत बड़ी भूमिका होती है। जिले में बेहतर तरीके से किए गए कांटेक्ट ट्रेसिंग का नतीजा है कि कोरोना का संक्रमण जिस क्षेत्र में मिला उसे वहीं रोका जा सका।

डॉ. मनीष मिश्रा, सीएमएचओ

Posted By: Nai Dunia News Network

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