Coronavirus Jabalpur News जबलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना के लक्षण मिलने के बाद सैंपल की जांच कराने वाले संदिग्ध मरीजों को पांच से छह दिन में कोविड की रिपोर्ट मिल रही है। इस दौरान वे मानसिक तनाव झेल रहे हैं। कोविड की रिपोर्ट पहले 24 घंटे में आ जाती थी, लेकिन केस बढ़ने के साथ ही रिपोर्ट भेजने में भी देरी की जा रही है। इससे कोरोना संदिग्ध परेशान हो रहे हैं।

कोविड जांच के लिए स्वाब का सैंपल देने के बाद मरीज संदिग्ध श्रेणी में आ जाता है। उसे क्वारंटाइन किया जाता है। इस दौरान संदिग्धों को रात भर नींद नहीं आ रही है। स्वजनों का कहना है कि कमरे में बंद होने के बाद वे फोन पर बताते हैं कि किस तरह से वे अवसाद में घिरते जा रहे हैं।

जांच के लिए यहां भेजे जाते हैं सैंपल

एनआइआरटीएच (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड ट्राइबल हेल्थ) - सुप्राटेक लैब - मेडिकल अस्पताल - ट्रू नेट लैब - निजी लैब - रेपिड एंटिजन टेस्ट के लिए

रिपोर्ट देर से आने के कारण

सैंपल की संख्या बढ़ गई है।

लैब में सैंपल पहुंचने के समय से रिपोर्ट देने के समय की गणना होती है। कई बार सैंपल सुबह लिए जाते हैं लेकिन वे शाम तक लैब पहुंचते हैं।

पुराने सैंपल की जांच बाद में, नए सैंपल की जांच कई बार पहले की जा रही है।

इनका कहना है

सुप्राटेक लैब से 48 घंटे में रिपोर्ट आती है। मेडिकल अस्पताल की लैब से सैंपल की रिपोर्ट देर से आ रही है। कई बार वहां बाद में आए सैंपल की जांच पहले कर देते हैं और पुराने सैंपल दबे रह जाते हैं। सैंपल की संख्या बढ़ने से यह स्थिति हो रही है। हालांकि सैंपल लेने के बाद क्वारंटाइन में कोरोना संदिग्ध मरीजों का इलाज प्रोटोकाल के अनुसार शुरू कर दिया जाता है। उन्हें सलाह दी जाती है कि वे खुद को पृथक रखें।

-डॉ. रत्नेश कुरारिया, सीएमएचओ, जबलपुर

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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