Current Column Jabalpur : नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए बाद गाड़ी में हूटर लगाकर नेताजी के अरमान इन दिनों सातवें आसमान पर है। नगर सत्ता में उनके विपक्ष का नेता चुना गया है, लंबे प्रयासों से ये तमगा मिला है,लिहाजा प्रोटाकाल में गाड़ी और वीआइपी सायरन भी मिला है। नेताजी का अंदाज थोड़ा चुलबुले और मजाकिया है। वो इस सायरन की धमक रह-रहकर अपने समर्थकों और मिलने वालों को सुनाते फिर रहे हैं। कहते हैं कि नेताजी के राजनीतिक गुरु के पास वीआइपी प्रोटाकाल था उस वक्त भी नेताजी अपने गुरु की सायरन लगी गाड़ी में घूमते -फिरते थे। अब खुद की गाड़ी में सायरन लग गया हैं तो हर गली-सड़क पर गाड़ी निकलते ही सायरन की आवाज सुनाई दे रही है। कई समर्थक को तो नेताजी फोन करके सायरन की धमक सुना रहे हैं। कहते हैं कि नेता को उम्मीद है कि सायरन वाली गाड़ी उनके विधायक के सपने को और अधिक मजबूत बनाएगी।

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दो विधायकों पर सबकी नजर-

कांग्रेस से भाजपा में आने वाले दो विधायकों की खबर से खलबली मची हुई है। कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के समर्थक सदमे में हैं। कांग्रेस जहां अपनी शर्तो पर आने का प्रयास कर रहे हैं वहीं भाजपाईयों को डर है कि पार्टी ने उनकी सुनी तो उनका भविष्य खतरे में आ जाएगा। दरअसल विधायकों के पाला बदलने के पीछे विधानसभा चुनाव है। विधायक पार्टी छोड़ने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें ही मौजूदा सीट से विधायक की टिकट मिलेगी। इस बात से पार्टी के दावेदार परेशान है उन्हें डर है कि सालों से हारी हुई सीट पर जमीन बनाने के बाद कहीं ऐसा न हो कि पार्टी पैराशूट से आए नेताओं को प्रत्याशी बनाकर उतार दे। फिलहाल नेताओं की नजर विधायकों के फैसले पर टिकी हुई है। हर नेता अपना राजनीतिक करियर विधानसभ क्षेत्र में तलाशने का प्रयास कर रहा है।

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कमजोर कड़ी पर निशाना-

आनलाइन बिजली बिलिंग साफ्टवेयर में खामियों का पुलिंदा खुला तो बिजली कंपनी में हड़ंकंप मच गया। सिर्फ राजस्व को लेकर दिन-दिनभर बैठक करने वाले अफसर बिजली उपभोक्ताओं के पैसे की सुरक्षा को लेकर बेफ्रिक थे जिसका नतीजा सतना में लाखों रुपये की हेराफेरी में दिखाई दिया। आरटीजीएस की प्रक्रिया में कमजोर कड़ी को निशाना बनाकर जालसाजों ने उपभोक्ताओं की रकम दूसरे उपभोक्ताओं के खाते में जमा करवा दी। कंपनी जिम्मेदारों की बजाए मामले को उजागर करने वाले पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश में है। बड़े अफसर जो इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार है वो अपना गिरेबान बचा रहे हैं, आनलाइन सिस्टम को बिना जांचे परखे ही लागू करना ही इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी खामी बनी। जिनके हाथों में आइटी से जुड़ी कमान थी उन्हें तक समझ नहीं आया कि जालसाज उनके सिस्टम में खामी तलाश चुके हैं। अब कंपनी साफ्टवेयर को बदलाव का बहाना बनाकर सुधार में जुटी है।

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कालेजों को हेलमेट बांटने का पुण्य-

पुलिस महकमे ने हेलमेट अभियान को सफल बनाने के लिए नए-नए जतन शुरू किए हैं। पहले चौराहों पर लोगों को जागरूक बनाने हेलमेट बांटा। भीड़ ऐसी लगी कि हेलमेट कम पड़ गए। इसके बाद विभाग ने चालानी कार्रवाई शुरू की। सड़कों पर जहा-तहां पुलिस नजरे गढ़ाकर वाहनों को पकड़ती दिखी,बावजूद हेलमेट का चलन प्रभावी नहीं नजर आ रहा है। ऐसे में अब महकमे ने कालेज और कोचिंग संस्थानों को हेलमेट बांटकर पुण्य कमाने का मौका दिया है। अफसर हेलमेट खरीदकर संस्था के विद्यार्थियों को बांटने के लिए संचालकों को फोन कर रहे हैं। संचालक अब परेशान हैं कि हेलमेट के नाम पर पुण्य कमाना उन्हें महंगा पड़ रहा है। कालेज संचालक समझ नहीं पा रहे हैं कि अफसरों के इस फरमान से उन पर जो लाखों रुपये का खर्च पड़ रहा है उसकी भरपाई वे कैसे करे। खबर है कि पुलिस हेलमेट पहनाकर युवाओं का सफर सुरक्षित करना चाह रही है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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