करंट कॉलम- पंकज तिवारी

बिजली महकमे में एक साहब की रासलीला के चर्चे आम हो रहे हैं। साहब का भाजपा की सरकार बनते ही तबादला हुआ और दबंग विधायक के इशारे पर उनकी पोस्टिग हुई। चर्चा है कि साहब का एक ऑपरेटर पर दिल आ गया है। जहां साहब वहां महिला ऑपरेटर आ जाती है। साहब के रहमो करम पर ही मोहतर्मा की नौकरी लगी है इसलिए उनका ख्याल भी बखूबी रखा जाता है। अब जबकि साहब जिले में है तो अपनी देखरेख में ही मैडम को तैनात करवा दिया है ताकि किसी तरह की कोई दिक्कत न हो। बताते हैं कि साहब का मैडम का हालचाल लेने का मन होता है झट से निजी वाहन पर सवार होकर पहुंच जाते हैं। उनकी इस लीला की भनक उनके चाहने वालों को भी लग चुकी है जो इसका पर्दाफाश करने के लिए स्टिंग करने की तैयारी में लगे हुए हैं।

पापा की सीख पर मंत्री जी :

बिजली उत्पादन और वितरण तकनीकी के साथ बेहद जटिल प्रकिया है। इसे सामान्य आदमी के लिए आसानी से समझना मुश्किल होता है। इस महकमे में मंत्री जी की रुचि बेजा बनी हुई है। वो लगातार दौरा कर जांच पड़ताल में जुटे हुए हैं। हर कहीं तकनीकी जानकारी के साथ खर्च कम करने पर जोर दे रहे हैं। खर्च कितना कम हुआ ये साफ नहीं है लेकिन उनकी पैनी निगाहें हर बार बिजली उत्पादन इकाईयों पर जाकर टिक जाती है। खबर है कि मंत्री जी के पिता इन्हीं इकाईयों में काम कर चुके हैं इसी वजह से इकाईयों में गड़बड़झाले को पकड़ने में ज्यादा रुचि बनी हुई है। महकमा भी हर उत्पादन इकाईयों में हो रहे दौरे से इसी संयोग को जोड़कर देख रहा है। इधर उत्पादन इकाईयों से जुड़े अफसर भी खामियों को पकड़ने के बावजूद उसे दबाने के लिए नए-नए बहाने बनाने में जुटे हुए हैं।

पैराशूट वाले न खींच ले मौका :

चुनाव की दूर-दूर तक कोरोना में सुगबुगाहट नहीं है फिर भी टिकट के दावेदारों की निगाहें हर विरोधी पर लगी हुई है। नेता भी कोई मौका चूकना नहीं चाह रहे हैं। पिछले दिनों समाजसेवी, शिक्षाविद् और संघ में पर्दे के पीछे से काम करने वाले एक युवा नेता ने औपचारिकतौर पर भाजपा की सदस्यता ली। जबलपुर छोड़ वो सीधे भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष से मिले और सदस्यता का ऐलान किया। उनकी आमद ने कई नेताओं का माथा ठनका दिया है। खबर है कि उनकी महापौर को लेकर दावेदारी है इस वजह से उन्होंने सार्वजनिक सदस्यता का ऐलान भी किया। ऐसे में सालों से टिकट की आस लेकर सक्रिय नेता डरे हैं कि पैराशूट वाले नेता कहीं उनका हक न मार ले। ये नेताजी भाजपा के थिंक टैंक माने जाने वाले संघ की पृष्ठ भूमि से जुड़े हैं जिस वजह से उनके विरोधी और ज्यादा आशंकित हैं।

निरीक्षण तो खूब किया कोरोना में इलाज से परहेज :

सरकारी अस्पतालों में बेहतर इंतजाम का बखान करने वाले नेता और अफसर खुद यहां उपचार करवाने से परहेज कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण की जद में पिछले दिनों नेता, अफसर हर कोई आया लेकिन ज्यादातर या यूं कहे कि हर किसी ने निजी अस्पतालों पर अधिक भरोसा जाहिर किया। जबकि आम आदमी इन्हीं नेता और अफसर के दावों पर ही भरोसा करके सरकारी सुविधा पर भरोसा करके उपचार करवा रहे हैं। जब नेताओं के कोरोना संक्रमित होने की खबरें आईं तो आइना दिखाने वालों ने सरकारी व्यवस्था के तहत उपचार करवाने की नसीहत दी ताकि दूर से निरीक्षण करने वाले भी करीब से व्यवस्थाओं का हाल देख सकें। उन्हें समझ आए कि क्यों आम आदमी सरकारी की बजाए निजी अस्पतालों पर इलाज करवाने भाग रहा है। जबकि निजी अस्पताल में लाखों रुपये इस महामारी से बचाने के लिए वसूल किए जा रहे हैं।

Posted By: Brajesh Shukla

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