रामकृष्‍ण परमहंस पाण्‍डेय, जबलपुर। सायबर अपराध की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। लोग अपनी गोपनीय जानकारियां आसानी से सायबर अपराधियों को देकर ठगी का शिकार हो रहे हैं। अज्ञात कालर के कहने पर अपने मोबाइल पर एप इंस्टाल करना बड़ा खतरा बन रहा है। जाब फ्राड, ओएलएक्स फ्राड, ओटीपी फ्राड, विदेश से महंगे गिफ्ट संबंधी फ्राड, लाटरी खुलने, मेट्रोमोनियल समेत तरह—तरह के फ्राड में फंसकर लोग अपनी जमापूंजी गवां रहे हैं। जबलपुर स्थित सायबर थाने में सालाना तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की सायबर ठगी की शिकायतें पहुंच रही हैं। साल दर साल बढ़ती सायबर ठगी की घटनाओं से पुलिस की परेशानी भी बढ़ रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सायबर ठगी से बचने के लिए एडवाइजरी जारी की की जाती है। जिनका पालन कर इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता है।

इन शहरों से जुड़े तार—

ओएलएक्स फ्राड—मेवाड भरतपुर राजस्थान व हरियाणा बार्डर।

बीमा फ्राड—दिल्ली, नोएडा एनसीआर।

ओटीपी फ्राड—झारखंड।

पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, कियोस्क के नाम पर फ्राड—पश्चिम बंगाल।

फेसबुक पर दोस्ती कर अश्लीलता की स्क्रीनिंग रिकार्डिंग—भरतपुर राजस्थान।

मेट्रीमोनियल व कस्टम फ्राड—दिल्ली से, जिसमें नाइजीरियन हेड होते हैं।

एटीएम क्लोनिंग—उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ व फैजाबाद।

लाटरी फ्राड केबीसी—झारखंड, दिल्ली, बिहार।

मोबाइल नंबर को लकी नंबरों में सेलेक्ट बताकर फ्राड—छतरपुर, महोबा।

नौकरी के नाम फ्राड—गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद, हरियाणा।

केस—1

एक युवक ने ई कामर्स पोर्टल अमेजन पर 19 सौ रुपये के प्लास्टिक बाक्स की बुकिंग की थी। आर्डर निरस्त होने के बाद रकम वापसी के लिए उसने गूगल पर कंपनी का कस्टमर केयर नंबर सर्च किया। नंबर मिलने पर उसने बातचीत की। जवाब देने वाले ने स्वयं को कंपनी का अधिकारी बताया। उसने युवक से मोबाइल पर एनीडेस्क एप डाउनलोड कराया। जिसके बाद ओटीपी भेजी। युवक के दो बैंक खातों से 3.48 लाख रुपये निकल गए।

केस—2

इंडिया मार्ट वेबसाइड से 35 हजार की इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदने के चक्कर में बालाघाट के शिक्षक ने 70 लाख रुपये गंवा दिए। शिक्षक ने इंटरनेट मीडिया पर इलेक्ट्रिक साइकिल का विज्ञापन देखा था। वेबसाइट के जरिए उसे सप्लायर का नंबर मिला। 35 हजार में सौदा तय होने के बाद अमेरिका से शिप द्वारा साइकिल भेजने, कस्टम ड्यूटी की प्रक्रिया बताकर उससे लाखों रुपये ठग लिए।

केस—3

अधारताल निवासी महिला शिक्षक के एटीएम की क्लोनिंग कर बैंक खाते से तीन लाख रुपये पार कर दिए। शिक्षक के मोबाइल पर रकम निकासी का मैसेज मिला। जिसके बाद उन्होंने बैंक व सायबर पुलिस थाने में शिकायत की। जिस एटीएम ​बूथ से रकम की निकासी की गई थी, वह छत्तीसगढ़ में स्थापित मिला।

केस—4

सेना के सेवानिवृत्त जवान ने लोन के लिए निजी बैंक में आवेदन किया था। जिसके बाद बैंक अधिकारी बनकर एक सायबर ठग उनसे बात करने लगा। ठग ने जवान के मोबाइल पर लिंक भेजी। जिसे क्लिक करने के बाद व्यक्तिगत जानकारी दर्ज कर दी।जिसके बाद उसके खाते से नौ लाख रुपये निकल गए।

केस—5

दस्तावेजों का नवीनीकरण न होने पर बीएसएनएल सिम बंद होने की जानकारी देकर सेवानिवृत्त प्रोफेसर से दो लाख रुपये ठग लिए गए। रकम ठगने के लिए सायबर ठग ने प्रोफेसर को मोबाइल पर लिंक भेजी गई थी। लिंक क्लिक कर प्रोफेसर ने अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज कर दी। जिसके बाद खाते से दो लाख रुपये निकल गए।

केस—6

सीधी निवासी सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी ने बाजार से कुछ सामग्री खरीदी थी। क्रेडिट कार्ड से पांच हजार रुपये का भुगतान किया। खाते से रकम निकली परंतु संबंधित के बैंक खाते में नहीं पहुँची। सैन्यकर्मी ने भारतीय स्टेट बैंक के टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद जालसाज ने बैंक अधिकारी बनकर उससे संपर्क किया। उसने सैन्यकर्मी के मोबाइल पर एनीडेस्क एप डाउनलोड कराया और पांच बार में 2 लाख 82 हजार रुपये बैंक खाते से पार कर दिए।

यह भी हो रहा है: जबलपुर निवासी एक युवक की फेसबुक आइडी पर अज्ञात युवती की रिक्वेस्ट आई। उसने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। जिसके बाद मैसेंजर पर दोनों में चैटिंग हुई। युवती ने उसी रात वीडियो काल किया। अश्लील बातें करने लगी और धीरे—धीरे अपने कपड़े उतारकर युवक को बाथरूम में जाने के लिए कहा। युवक बाथरूम में चला गया। उसने भी अपने कपड़े उतार दिए। दोनों के बीच अश्लील बातचीत हुई। युवती ने वीडियो काल को रिकार्ड कर लिया और उसे इंटरनेट मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर युवक से लाखों रुपये हड़प लिए।

सायबर पुलिस की एडवाइजरी—

1—फोन काल्स पर अज्ञात व्यक्ति द्वारा दिए जा रहे निर्देशों का पालन न करें।

2—रिमोट एप्स/स्क्रीन शेयरिंग एप जैसे टीम व्यूवर, एनीडेस्क, क्विक सपोर्ट इत्यादि किसी अज्ञात कालर के कहने पर इंस्टाल न करें।

3—एटीएम का उपयोग करते समय अपना डेबिट कार्ड किसी अनजान व्यक्ति को न दें व एटीएम कार्ड इंटर करने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि एटीएम पर किसी भी प्रकार की कोई हैकिंग डिवाइस नहीं लगी है।

4—किसी भी अज्ञात स्रोत द्वारा भेजे गए फर्जी लिंक को किसी भी परिस्थि​ति में क्लिक न करें।

5—बैंक से संबंधित कोई भी मैसेज प्राप्त होने पर बैंक शाखा जाकर अनिवार्य रूप से जानकारी प्राप्त करें ।

6—फोन काल्स पर बैंक कर्मी बताते हुए अज्ञात व्यक्ति द्वारा दिए जा रहे निर्देशों का पालन न करें। बैंक के द्वारा कभी भी फोन के माध्यम से ग्राहकों से जानकारी का आदान—प्रदान नहीं किया जाता है।

7—अपनी कोई भी व्यक्तिगत जानकारी इंटरनेट मीडिया पर साझा न करें।

8—बैंक से संबंधित अपने पासवर्ड, अपनी जन्मतिथि, विवाह की तिथि, मोबाइल नंबर इत्यादि की जानकारी अपने मोबाइल व इंटरनेट मीडिया एकाउंट पर न रखें। क्योंकि इनके उपयोग से बनाए गए पासवर्ड आसानी से क्रैक किए जा सकते हैं।

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सावधानी व जागरुकता से सायबर अपराधों से बचा जा सकता है। वर्तमान समय में तकनीक बढ़ने से सायबर अपराधों में तेजी आई है। पढ़े लिखे लोग भी सायबर अपराध का शिकार हो रहे हैं। सायबर ठगी से बचने के लिए अपना बैंक एकाउंट नंबर, पासवर्ड आदि की जानकारी गोपनीय रखना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में अवांछनीय लिंक को​ क्लिक न करें। बैंक से संबंधित कामकाज के लिए कस्टमर केयर नंबर पर भरोसा न कर बैंक की शाखा जाना चाहिए।

विपिन ताम्रकार, निरीक्षक, सायबर थाना

Posted By: Ravindra Suhane

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