जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बरसात थमने के बाद डेंगू मरीजों की संख्या में आई कमी के बावजूद मौसमी बुखार पीछा नहीं छोड़ रहा है। चिकित्सकों के औषधालय से लेकर अस्पतालों तक बुखार के मरीजों की भीड़ बरकरार है। रोजाना औसत 400 से ज्यादा बुखार के मरीज चिकित्सीय परामर्श लेने पहुंच रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में डेंगू के मरीजों की संख्या में आई कमी के बावजूद जिले में अब तक 705 लोगों को डेंगू के मच्छर डंक मार चुके हैं। लाखों की आबादी वाले जिले मेें मंगलवार को डेंगू का सिर्फ एक नया मरीज सामने अाया था। चिकित्सकों का कहना है कि बरसात रुकने के कारण तथा मच्छरों से बचाव के प्रति जागरुकता के कारण डेंगू का प्रकोप कम हुआ है। परंतु मौसम में बदलाव के कारण मौसमी बुखार का खतरा अभी बना हुआ है। बच्चे शीघ्रता से इस बुखार की चपेट में आ रहे हैं। वायरल, टाइफाइड, चिकनगुनिया के मरीज भी सामने आ रहे हैं।

प्लेटलेट्स पर रख रहे नजर: डेंगू का खतरा कम होने के बाद भी पैथालाजी केंद्रों में मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। दरअसल, लोग डेंगू से इतने भयभीत हैं कि बुखार होने पर प्लेटलेट्स की जांच कराने पैथालाजी केंद्र पहुंच जाते हैं। इधर, चिकित्सक भी बुखार के मरीजों की सीबीसी जांच पर जोर दे रहे हैं ताकि रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा पर नजर रखी जा सके। विक्टोरिया अस्पताल के भेषज विशेषज्ञ डा. संदीप भगत ने बताया कि गत माह की तुलना में डेंगू का खतरा कम हुआ है। वायरल बुखार के मरीज अस्पताल में उपचार कराने पहुंच रहे हैं। हालांकि उनकी संख्या में भी कमी देखी जा रही है। डा. भगत ने कहा कि बुखार होने पर रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा गिरने की संभावना रहती है। इसलिए बुखार के मरीजों की प्लेटलेट्स की जांच कराई जाती है।

घर-घर सर्वे जारी: जिला मलेरिया अधिकारी डा. राकेश पहारिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू की रोकथाम के लिए अभियान चलाया जा रहा है। घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य कर्मचारी लोगों को लार्वा विनष्टीकरण के प्रति जागरुक कर बुखार के मरीजों की खोज कर रहे हैं। डा. पहारिया ने कहा कि इस माह डेंगू से बड़ी राहत मिली है। अन्य कारणों से हाेने वाले बुखार के मरीजों संख्या भी धीरे-धीरे कम हो रही है। उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव के दौराना बच्चों की सेहत का ध्यान रखना आवश्यक है।

वायरल बुखार- उल्टी दस्त के साथ पेट दर्द, सिर दर्द, जोड़ों में दर्द, गले में दर्द, थकान, शरीर का तापमान बढ़ना, खांसी, त्वचा पर रेशेज होना, सर्दी, आंखों में लाली जैसे लक्षण वायरल बुखार के हैं। आमतौर पर यह बुखार 3-4 दिन तक मरीज को परेशान करता है। इस दशा में मरीज को दूषित पानी व भोज्य पदार्थ से बचना चाहिए।

डेंगू- सिर दर्द, मांस पेशियों, हडि्डयों व जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते होना, जी मिचलाना, आंखों के पीछे की ओर दर्द, स्वाद का पता न चलना व भूख न लगना, चक्कर आना, जैसे कुछ अन्य लक्षण डेंगू के हैं। सरकारी आंकड़ों में इस वर्ष डेंगू के 705 मरीज मिल चुके हैं। इस दौरान साधारण डेंगू, हेमरेजिक व शाक सिंड्रोम डेंगू के मरीज मिले। डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों से सुरक्षा आवश्यक है।

टाइफाइड- सिर दर्द, भूख में कमी, सर्दी जुकाम, कफ की समस्या, पेट दर्द, दस्त, कब्ज, बेचैनी, सुस्ती, थकान जैसे लक्षण टाइफाइड के हैं। शहर में टाइफाइड के तमाम मरीज सामने आ चुके हैं। टाइफाइड के मरीजों को साफ व उबला हुआ पानी पीना चाहिए। अच्छी तरह से पका हुआ गर्म भोजन करना चाहिए।

मलेरिया- जिले में इस वर्ष मलेरिया मरीजों की संख्या बीते वर्षों की तुलना में कम रही। ठंड, तेज बुखार, सिर दर्द, गले में खरास, पसीना आना, थकान, बेचैनी, उल्टी जैसे लक्षण मलेरिया बुखार के हैं। मादा एनाफिलीज मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी से बचाव के लिए घर तथा आसपास पानी जमा न होने दें।

तारीख-बुखार के मरीज

12 अक्टूबर-516

11 अक्टूबर-499

10 अक्टूबर-512

9 अक्टूबर-634

8 अक्टूबर-416

7 अक्टूबर-230

6 अक्टूबर-270

5 अक्टूबर-371

4 अक्टूबर-572

3 अक्टूबर-350

2 अक्टूबर-320

1 अक्टूबर-450

Posted By: Ravindra Suhane

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