जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण में इंदौर की तर्ज पर जबलपुर को अव्वल लाने के लिए नगर निगम पैसा और पसीना तो बहा रहा है। लेकिन शहर सफलता का स्वाद अब तक नहीं चख पाया है। पिछले तीन वर्षों के स्वच्छ सर्वेक्षण के नतीजों की बात करें तो वर्ष 2019 में जबलपुर 25वें स्थान पर रहा। जबकि 2020 में 17वें और 2021 में तीन पायदान फिसल कर 20वें स्थान पर आ गया। जबकि नगर निगम सफाई व्यवस्था के नाम पर हर माह लाखों रुपया खर्च कर रहा है। यहां तक की सड़कों की सफाई भी मशीन के माध्यम से कराई जा रही है।

शहर को धूल मुक्त रखने के लिए रोड स्वीपर मशीन (धूल साफ करने वाले वाहन ) से सड़कों की सफाई के नाम पर हर माह करीब करीब 28 लाख रुपये का डीजल फूंका जा रहा है। कुछ चुनिंदा सड़कों को छोड़कर अन्य सड़कें अब भी धूल-धूसरित है। सिविल लाइन, इंदिरा मार्केट जैसे पाश इलाकों को यदि छोड़ दें तो नौदरा ब्रिज, तीन पत्ती, छोटी लाइन, मालवीय चौक, रानीताल, बदलदेव बाग, दमोहनाका सहित अन्य मुख्य सड़कों से धूल के गुबार उठ रहे हैं। नौदरा ब्रिज, रानीतालाल, दमोहनाका में निर्माण कार्य के चलते जहां सड़कें धूल से सनी हुई है वहीं अन्य क्षेत्रों की सड़कों में भी धूल उड़ रही है। नगर निगम का पूरा ध्यान सिविल लाइन, इंदिरा मार्केट से हाई कोर्ट और विजय नगर, एमआर फोर रोड की सड़कों की सफाई करने में रहता है। क्योंकि इन सड़कों से रोजाना हाई कोर्ट के जज, जनप्रतिनिधि, कलेक्टर सहित आला अधिकारी गुजरते हैं।

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स्वच्छ सर्वेक्षण के नाम पर गत वर्ष तीन करोड़ रुपये किए थे खर्च: स्वच्छ सर्वेक्षण के नाम पर नगर निगम पिछले एक वर्ष में करीब तीन करोड़ रुपये सड़क की धूल साफ करने में ही खर्च कर चुका है। नगर निगम ने वर्ष 2018 में 84 लाख रुपये खर्च कर दो रोड स्वीपर मशीनें खरीदी थी। दावा किया गया था मशीन से सड़कों की सफाई करने से सड़कों की धूल के बारीक से बारीक कण साफ हो जाएंगे। लेकिन रखरखाव के अभाव में एक मशीन कबाड़ हो गई।

- नगर निगम ने वर्ष 2019 में इंदौर की कंपनी आइडब्लूबीएम से एक वर्ष के लिए किराये पर चार मशीनें ली। किराये की मशीनों के एवज में एक माह में करीब 30 लाख रुपये खर्च किए गए। यानी एक वर्ष में तकरीबन तीन करोड़ 60 लाख ररुपये फूंक दिए गए। लेकिन स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 में भी जबलपुर टाप-10 में नहीं आ पाया। जबलपुर 17 वें स्थान पर रहा। इसके बाद हाल में ही नगर निगम ने दो और मशीनें ली है। नगर निगम के बेड़े में वर्तमान में चार मशीनें हैं जिसमें से एक खराब है। बाकी तीन में से दो मशीन से ही सफाई कराई जा रही है।

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ऐसे धूल के नाम पर उड़ाई रकम-

- 14 से 15 लीटर डीजल एक घंटे में एक मशीन पर होता है खर्च

- 70 रुपये के हिसाब से नगर निगम के पेट्रोल पंप से दिया जा रहा डीजल है

- 40 हजार लीटर डीजल हर माह दिया जा रहा।

- 3 मशीनों से लिया जा रहा काम

- 28 लाख रुपये हर माह धूल की सफाई में किए जा रहे खर्च

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नगर निगम के पास चार रोड स्वीपर मशीनें हैं। दो पहले से थी दो नई खरीदी हैं। इसके लिए 40 हजार लीटर डीजल दिया जा रहा है।

जीएस मरावी, वर्कशाप प्रभारी,नगर निगम

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Posted By: Ravindra Suhane

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