जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) के पीठासीन अधिकारी राम निवास पटेल की कोर्ट ने अंतरिम आदेश में व्यवस्था दी कि दो किश्त में डेढ़ लाख रुपये जमा करने की शर्त पूरी करने पर याचिकाकर्ता के खिलाफ कठोर कार्रवाई न की जाए। मामला कलेक्टर सिंगरौली द्वारा पारित आदेश को चुनौती से संबंधित है।

याचिकाकर्ता सिंगरौली निवासी मनराखन की ओर से अधिवक्ता मनीष मेश्राम व अंचन पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने 2006 में मध्यांचल ग्रामीण बैंक से लोन लिया था।जिसकी अदायगी के लिए निर्धारित किश्तें 2017 तक चुकाता रहा। इसके बाद किश्तें नहीं चुका पाया। इस वजह से उसके ऊपर चार लाख 65 हजार की देनदारी बढ़ गई। जब नोटिस के बावजूद राशि अदा नहीं की तो बैंक ने कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर दिया। जिस पर सुनवाई के बाद कलेक्टर ने याचिकाकर्ता के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई का आदेश पारित कर दिया।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि उसने जो जमीन गिरवी नहीं रखी थी, उसे गिरवी दर्शाकर कलेक्टर से आदेश पारित करवा लिया गया है। लिहाजा, कलेक्टर के आदेश के पारिपालन में संभावित कठोर कार्रवाई पर रोक अपेक्षित है। डीआरटी ने एक माह के भीतर दो किश्तों में डेढ़ लाख जमा करने की शर्त पर कठोर कार्रवाई पर रोक लगाई जाती है।

नगर पालिक निगम को एक दुकान सुरक्षित रखने के निर्देश के साथ नोटिस :

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी की एकलपीठ ने नगर पालिक निगम, सागर को एक दुकान सुरक्षित रखने के अंतरिम निर्देश के साथ नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। याचिकाकर्ता सागर निवासी जवाहर लाल मुखारया की ओर से अधिवक्ता शंभूदयाल गुप्ता, कपिल गुप्ता ने पक्ष रखा।

उन्होंने दलील दी कि 1991 में नगर सुधार न्यास, सागर द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय वाणिज्य परिसर में दुकानों के निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित की थी। इस सिलसिले में याचिकाकर्ता ने आवेदन-पत्र व राशि जमा करने सहित सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी थीं। उसे दुकान क्रमांक-20 का आवंटन किया गया था।लेकिन कुछ समय बाद नगर सुधार न्यास का नगर पालिक निगम, सागर में विलय हो गया।लिहाजा, पुरानी प्रक्रिया को विलोपित कर नये सिरे से दुकान आवंटन किया जाने लगा। चूंकि इससे याचिकाकर्ता का हित प्रभावित हुआ, अत: हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई।

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