जबलपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में सोमवार से एक बार फिर लागू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था के हालात तीन साल बाद भी जस के तस हैं। ई-अटेंडेंस में खास सुधार नहीं आ पाया है। सुबह-सुबह स्कूल पहुंचे अधिकांश शिक्षक, कर्मचारियों को ई-अटेंडेंस की तकनीकी खामियों से जूझना पड़ा।

शहरी क्षेत्र में तो अटेंडेंस को लेकर ज्यादा समस्या नहीं आई, लेकिन ग्रामाीण इलाकों में ई-अटेंडेंस ने शिक्षकों का पसीना छुटा दिया। मझौली ब्लॉक के दो स्कूलों में ई-अटेंडेंस नहीं लगने पर शिक्षकों का ब्लडप्रेशर तक बढ़ गया। जबकि इंद्राना स्कूल में शिक्षक सहित प्राचार्य बार-बार अटेंडेंस लगाते रहे, लेकिन अटेंडेंस शो नहीं हो रही थी। बाकी स्कूलों में कहीं 9 बजे लगाई गई अटेंडेंस का टाइम एम शिक्षा मित्र एप में 11 बजे का दिख रहा था। तो कहीं स्कूल से अटेंडेंस लगाने पर भी एप में उनकी स्कूल से दूरी 2 से 3 किमी दिख रही थी।

काम नहीं कर रहा था सर्वर -

मझौली ब्लॉक के मुड़ारी स्कूल के सहायक शिक्षक राजेन्द्र दुबे समय पर स्कूल पहुंच गए। ई-अटेंडेंस लगाया तो सर्वर काम नहीं कर रहा था। अटेंडेंस न लगने पर शिक्षक का ब्लडप्रेशर बढ़ गया। यहीं हाल कंजई स्कूल के शिक्षक रविशंकर चौधरी के साथ हुआ। स्कूल में मौजूद शिक्षकों ने किसी तरह उन्हें संभाला।

एम शिक्षा मित्र का नया बर्जन भी बेअसर -

- ई-अटेंडेंस के लिए एम शिक्षा मित्र के नए अपडेट वर्जन 6.2 को लांच किया गया है, लेकिन ई-अटेंडेंस के मेन सर्वर में आ रही तकनीकी खामियों से ये वर्जन भी काम नहीं कर रहा।

- गोसलपुर के धरमपुरा, बरगी, मझगंवा, इंद्राना सहित दूर-दराज के स्कूलों में मोबाइल नेटवर्क न मिलने से अधिकांश शिक्षकों की अटेंडेंस नहीं लग पाई।

- गांधीग्राम स्कूल में शिक्षकों ने अटेंडेंस 9 बजे लगाई, लेकिन एम शिक्षा मित्र के आप्शन में 11 बजकर 5 मिनट पर स्कूल में एंट्री दर्शाई गई। कई शिक्षकों के पासवर्ड काम नहीं कर रहे थे। स्कूल परिसर से अटेंडेंस लगाने पर भी शिक्षकों की दूरी 2 से 3 किमी दूर बता रहा था एप।

पोर्टल रहा बंद, रिपोर्ट भी नहीं भेज पाए -

एजुकेशन पोर्टल भी सोमवार को धोखा दे गया। जिले में कहां कितने शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस लगाई इसकी रिपोर्ट भोपाल भेजनी थी, लेकिन शाम तक पोर्टल ही नहीं खुला। जिसके कारण अटेंडेंस रिपोर्ट देर शाम तक भोपाल नहीं भेजी जा सकी।

2015 से लागू, कब-कब हुई बंद -

- शिक्षक,कर्मचारियों को समय पर स्कूल पहुंचाने के लिए ई-अटेंडेंस व्यवस्था सितम्बर 2015 में शुरू की गई थी।

- नेटवर्क, अक्षांश-देशांक्ष (स्कूल से दूरी) पासवर्ड जैसी तकनीकी समस्या के चलते ये प्रभावी नहीं हो सकी।

- 2016 में अध्यापकों की जनहित याचिका पर ग्वालियर हाईकोर्ट ने ई-अटेंडेंस पर रोक लगा दी थी। 2017 में फिर इसे सख्ती से लागू किया गया।

- एक अपै्रल 2018 को मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद फिर अटेंडेंस व्यवस्था ठंडे बस्ते में चली गई। फिर इसे 11 जून से लागू कर दिया गया।

वेतन से जोड़ा, जल्द दिखेगा असर -

- ई-अटेंडेंस व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में ठीक से काम नहीं कर रही है बावजूद इसके प्रभारी डीईओ डॉ.कामायनी कश्यप ने 11 जून से इसे अनिवार्य कर दिया है। संकुल प्राचार्य व आहरण संवितरण अधिकारियों को आदेश जारी कर ई-अटेंडेंस का सख्ती से पालन कराने और ई-अटेंडेंस की मासिक रिपोर्ट के साथ ही शिक्षक, कर्मचारियों का वेतन पत्रक तैयार कर ट्रेजरी को भेजने कहा है।

- आदेश में शिक्षकों को ये सुविधा जरूर दी गई है कि जिन शिक्षकों के पास स्मार्ट फोन नहीं हैं वे अपने साथी शिक्षकों के मोबाइल से अपने पासवर्ड से अटेंडेंस लगा सकते हैं।

स्कूल में सभी ने ई-अटेंडेंस लगाई। जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं थे उन्होंने जरूर एसएमएस से अटेंडेंस लगाई।

-रामकुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य, करौंदी ग्राम रांझी हायर सेकंडरी स्कूल

स्कूल में कुछ लोगों की अटेंडेंस नेटवर्क, पासवर्ड के कारण अटेंडेंस नहीं पाई। कुछ ने लगाई तो उनकी टाइमिंग गलत दिख रही।

-राकेश शर्मा, प्राचार्य, गांधीग्राम हायर सेकंडरी स्कूल

ई-अटेंडेंस में अभी भी तकनीकी समस्या सामने आ रही है। प्राचार्यों से जानकारी लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।

-हेमंत खुहटानिया, प्रभारी, एम शिक्षा मित्र

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