जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल में नवरात्र पर भक्ति की धारा बह रही है। जेल में बंद आठ सौ बंदियों ने नवरात्र का उपवास रखा है। करीब 12 बंदियों ने मिलकर दो दुर्गा प्रतिमाएं बनाई हैं, जिनका पूरे विधि विधान से प्रतिदिन पूजा पाठ व आरती की जा रही है।

जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर ने बताया कि दोनों प्रतिमाओं को बनाने में दो अनुभवी बंदियों का महत्वपूर्ण योगदान है। दोनों वर्षों से गणेश व दुर्गा प्रतिमा बनाने का काम कर रहे थे। इसी बीच अपराधों में सजा हुई और दोनों जेल पहुंच गए। दुर्गा प्रतिमाओं को तैयार करने में जेल के तालाब की मिट्टी का प्रयोग किया गया हैं। गौशाला से गोबर, चारा और लकड़ी के पटा भी कैदियों ने ही बनाकर तैयार किए हैं। यहां तक कि दोनों प्रतिमाओं के लिए वस्त्र भी जेल में बंद कैदियों ने ही तैयार किए हैं। बाकी साजो सामान एवं श्रंगार जेल के बाहर से लाया गया था।

दोनों खंडों में रखी प्रतिमाएं-

जेल में दो खंड हैं। पूर्वी खंड एवं पश्चिमी खंड। दोनों खंडों में बंदियों को रखा जाता है। बंदियों ने दोनों खंडों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए विशेष रुप से सजावट की है। जेल प्रशासन द्वारा बंदियों की भक्तिभाव को देखते हुए दोनों खंडों में प्रतिमाओं की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्थापना कराई गई है। आकर्षक साज सज्जा के साथ सैकड़ों कैदी सुबह-शाम मां की आरती एवं पूजा-अराधना करते हैं।

फलाहार की व्यवस्था, पंडित करा रहे पूजा-

जेल अधिकारियों के मुताबिक नवरात्र के पर्व में आठ सौ बंदियों ने पूरे नौ दिन का उपवास रखा है। व्रत रखने वालों में महिला बंदी भी शामिल हैं। जेल प्रशासन ने सभी के फलाहार एवं दूध की व्यवस्था की है। दोनों खंडों में कैदी पंडितों द्वारा पूरे विधि विधान से मंत्रोच्चार कर मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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