जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। करोड़ों की चल व अचल संपत्ति के आसामी सेवानिवृत्त सीईओ नागेंद्र यादव के बैंक लाकर में 414 ग्राम वजनी सोने के जेवर मिले। ईओडब्ल्यू अधिकारियों ने जेवर जब्त कर लिए हैं। जब्त जेवरों की कीमत लाखों रुपये आंकी गई है। सोमवार को ईओडब्ल्यू के अधिकारी मंडला पहुंचे। जहां दो बैंकों में तीन लाकर खोले गए।

दो लाकर में कोई कीमती सामान नहीं मिला परंतु एक लाकर में 414 ग्राम के सोने के जेवर मिले। नागेंद्र से ईओडब्ल्यू अब तक एक किलो 14 ग्राम सोना व दो किलो चांदी के जेवर जब्त कर चुकी है। उक्त कार्रवाई के बाद ईओडब्ल्यू की टीम भोपाल जाने की तैयारी में है। जहां कटारा हिल्स स्थित उसके मकान की जांच की जाएगी। पूना में भी उसकी अचल संपत्ति का पता लगाया जा रहा है। उसकी 50 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमती चल अचल संपत्ति का पता लगाया जा चुका है। ईओडब्ल्यू डीएसपी प्रदीप जैन, डीएसपी मंजीत सिंह के नेतृत्व में नागेंद्र के खिलाफ कार्रवाई जारी है।

यह है मामला: आदिम जाति कल्याण विभाग में कार्यवाहक सीईओ पद से सेवानिवृत्त नागेंद्र यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत ईओडब्ल्यू में की गई थी। जिसकी जांच के बाद विगत दिवस ईओडब्ल्यू टीम ने उसके जबलपुर व मंडला स्थित ठिकानों पर एक साथ सर्च कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान महाराजपुर मंडला में करोड़ों रुपये कीमती कृषि भूमि, बिछिया मंडला में बेशकीमती कृषि भूमि, महाराजपुर मंडला में पैतृक मकान जिसे तुड़वाने के बाद लाखों रुपये खर्च कर नया बनवाया गया, महाराजपुर मंडला में व्यवसायिक प्रयोजन हेतु दो मंजिला पक्का भवन, भोपाल में फ्लैट, तिलहरी जबलपुर में बेशकीमती दो मंजिला भवन, एक चार पहिया व एक दो पहिया वाहन, एक लाख 84 हजार नकद, तिलहरी स्थित घर में 300 ग्राम से ज्यादा सोने के जेवर, मंडला स्थित घर में 300 ग्राम सोना व दो किलो चांदी के जेवर, कई बैंक खाते व बैंक लाकर, बीमा कंपनियों में निवेश का पता चला था। 2005 से 2010 के बीच अर्जित वेतन की तुलना में उसके पास 716 फीसद ज्यादा संपत्ति पाई गई। 2010 में उसके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत की गई थी।

सीईओ बनते ही बदले दिन: बताया जाता है कि नागेंद्र ने बालाघाट में 29 जनवरी 1990 से आदिम जाति कल्याण विभाग में मंडल संयोजक की नौकरी शुरू की थी।10 फरवरी 2005 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति दी गई थी। जिसके बाद उसे जनपद पंचायत घुघरी मंडला में प्रतिनियुक्ति देकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रभार सौंपा गया था। 25 जून 2010 तक वह सीईओ पद पर कार्यरत रहा। उक्त पदस्थापना अवधि में उसने खूब संपत्ति बटोरी थी।

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आय से अधिक संपत्ति के मामले में नागेंद्र के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मंडला में खोले गए तीन बैंक लाकर में 400 ग्राम से ज्यादा सोना पाया गया। जब्त जेवर के संबंध में नागेंद्र से पूछताछ की जा रही है।

देवेंद्र सिंह राजपूत, एसपी, ईओडब्ल्यू

Posted By: Ravindra Suhane

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