जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मेरे मरीज के दिमाग में यह बात घर कर गई है कि अस्पताल में नकली दवाएं दी जाती हैं। वह बहुत डरा हुआ है और मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती होना चाहता है। डिस्चार्ज मांगने पर अस्पताल वालों ने चार लाख रुपये का बिल थमा दिया है। इलाज में हुए खर्च की व्यवस्था मेें जेवर समेत घर के अन्य जरूरी सामान गिरवी रखे जा चुके हैं अब और रकम कहां से लाएं। यह पीड़ा जाहिर करते हुए कोराेना संक्रमित मरीज के मौसा रविवार रात सिटी अस्पताल के बाहर सड़क के किनारे अनशन पर बैठ गए।

11 दिन चले उपचार के बाद भी सेहत में सुधार नहीं : गुरैयाघाट गौर निवासी अशोक साहू ने कहा कि उनके रिश्तेदार का बेटा प्रशांत साहू 33 वर्ष निवासी नैनपुर मंडला कोरोना से संक्रमित है। पांच मई को उसे सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 11 दिन चले उपचार के बावजूद सेहत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। इसी बीच अस्पताल के मरीजों को नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने की घटना सामने आई। जिसके बाद प्रशांत डर गया और मेडिकल कॉलेज में उपचार कराने की जिद करने लगा। रविवार को अस्पताल प्रबंधन से डिस्चार्ज करने के लिए कहा गया। जिसके बाद चार लाख रुपये का बिल व दवाओं का अलग खर्च बता दिया गया। एक लाख रुपये किसी तरह वे जमा कर चुके हैं। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से गरीबी का हवाला देते हुए राहत की मांग की परंतु कोई सुनने तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पूर्व शहर स्थित मेडिकेयर अस्पताल में तीन दिन उपचार के बदले डेढ़ लाख रुपये वसूल लिए थे। इस दौरान ओमती पुलिस मौके पर पहुंची। अशोक साहू ने धरने से उठने से इनकार कर दिया।

Posted By: Sunil Dahiya

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