जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एक महिला कर्मचारी का नाम सामने आया है। उसकी ड्यूटी स्पाइनल इंज्यूरी सेंटर के कोविड वार्ड में लगाई गई थी। एसटीएफ कोे पता चला है कि महिला कर्मचारी एक इंजेक्शन कोरोना के तीन मरीजों को लगाती थी। शेष बचे इंजेक्शन मेडिकल के ही कुछ बिचौलियों के माध्यम से महंगे दाम पर बेच देती थी। महिला कर्मचारी की भूमिका का पता लगानेक के लिए एसटीएफ सक्रिय हो गई है।

इधर, विक्टोरिया अस्पताल से दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ सरगना की तलाश में जुटी है। एसटीएफ को आशंका है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी गिरोह बनाकर की गई। गिरोह के कई सदस्यों पर शिंकजा कसने के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं।

आनंद पटेल, राहुल सेन व राहुल विश्वकर्मा ने मुंह खोला: एसटीएफ की गिरफ्त में आए विक्टोरिया अस्पताल के कर्मचारी राहुल सेन व अानंद पटेल तथा मेडिकल कर्मी राहुल विश्वकर्मा ने मुंह खोल दिया है। एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि तीनों आरोपित गलत पर्चे पर विक्टोरिया अस्पताल के स्टोर से रेमडेसिविर इंजेक्शन निकलवाकर उनकी कालाबाजारी करते थे। योजनाबद्ध तरीके से की गई कालाबाजारी में उनकी मदद करने वालों का पता चला है। मेडिकल कर्मी राहुल विश्वकर्मा कम्प्यूटर ऑपरेटर था। वह अपने जान पहचान केे लोगों का आधारकार्ड लेकर उनके नाम पर ओपीडी की पर्ची बना लेता था। डॉक्टर के नाम की फर्जी सील लगाकर विक्टोरिया के स्टोर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग राहुल सेन के माध्यम से भेजता था। स्टोर तक परची पहुंचाने का काम आनंद पटेल करता था। अलग-अलग नाम पर बनाई गई सात पर्ची अानंद के घर से जब्त की गई थी। एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि तीनों आरोपित हिरासत में हैं। पूछताछ, दस्तावेज व मोबाइल की सीडीआर से महत्वपूर्ण जानकारियां मिली है।

भौतिक सत्यापन जारी: विक्टोरिया अस्पताल परिसर स्थित स्टोर से जब्त दस्तावेजों के आधार पर एसटीएफ कोरोना मरीजों का भौतिक सत्यापन कर रही है। इस दौरान यह जानकारी सामने आई है कि उन लोगों के नाम पर भी रेमडेसिविर इंजेक्शन स्टोर से दिया गया जो कोरोना से संक्रमित नहीं हुए थे। इधर, कुछ मरीजों ने बताया कि उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं दिया गया था। जबकि उनके उपचार संबंधी दस्तावेजों में इंजेक्शन के 6-6 डोज लिखे गए हैं।

यह है मामला: रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का नेटवर्क ध्वस्त करने की कोशिश में एसटीएफ ने 19 अप्रैल को गंगानगर गढ़ा निवासी सुधीर सोनी और राहुल विश्वकर्मा को पकड़ा था। उनके कब्जे से दो रेमडेसिविर इंजेक्शन जब्त किए गए थे। दोनों 19-19 हजार रुपये में इंजेक्शन की सौदेबाजी करने पहुंचे थे। पूछताछ में संस्कारधानी हॉस्पिटल के पैथालाजी कर्मचारी राकेश मालवीय का नाम सामने आया। जिसके बाद कड़ी आशीष हॉस्पिटल के डॉ. नीरज साहू व एक अन्य निजी अस्पताल के डॉ. जितेंद्र सिंह तक जुड़ती गई। एसटीएफ ने झोलाछाप डॉक्टर नीरज व जितेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। दोनों की चिकित्सा डिग्री फर्जी निकली। जिसे बनाने वाला दमोह का रवि पटेल भी पकड़ा जा चुका है।

Posted By: Ravindra Suhane

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