जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। Fake Remdesivir Racket in Jabalpur। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में पकड़े गए दो डॉक्टरों में से एक की डिग्री फर्जी निकली। दूसरा परंपरागत से गैर पैथी के निजी मेडिकल कॉलेज में तृतीय वर्ष का छात्र है। एसटीएफ ने डिग्री की जांच के लिए कॉलेज प्रशासन से पत्राचार किया था। निजी अस्पतालों में कार्यरत दोनों कथित चिकित्सकों की डिग्री को लेकर एसटीएफ प्रकरण में जालसाजी की धाराएं बढ़ाने की तैयारी में है। एसटीएफ ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से पत्राचार कर निजी अस्पतालों के पंजीयन व हेल्थ वर्कर की पदास्थापना नियमों की जानकारी मांगी है।

एसटीएफ डीएसपी ललित कश्यप ने बताया कि 20 अप्रैल को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। जिनमें दो डॉक्टर थे, जो निजी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे थे। आरोपित डॉ. नीरज साहू आशीष तथा दूसरा डॉ. जितेंद्र अन्य अस्पताल लाइफ मेडिसिटी हॉस्पिटल में कार्यरत था। दोनों ने नौकरी पाने के लिए जबलपुर स्थित एमईएच अल्टरनेटिव मेडिकल कॉलेज के नाम से जारी डिग्री का सहारा लिया था। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर दोनों की डिग्री की जांच के लिए महाविद्यालय में पत्र भेजा गया था। पत्र में जवाब से स्पष्ट होता है कि नीरज साहू की डिग्री फर्जी है। जबकि जितेंद्र ठाकुर महाविद्यालय में अध्ययनरत हैं

दूसरी एफआइआर, मांगेंगे रिमांड-

डीएसपी ने बताया कि दोनों के खिलाफ पृथक से एफआइआर दर्ज कर कोर्ट से पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी। दरअसल, अप्रैल माह में हुई कार्रवाई के बाद से सभी आरोपित जेल में हैं। नीरज व जितेंद्र से इंजेक्शन की कालाबाजारी के संबंध में महत्वपूर्ण पूछताछ नहीं हो पाई है। एसटीएफ को कोर्ट से रिमांड नहीं दी गई। फर्जी डिग्री मामले के आधार पर पुलिस दाेनों को रिमांड पर लेकर इंजेक्शन की कालाबाजारी का राजफाश करेगी।

अस्पतालों पर तय हो जिम्मेदारी: जाली डिग्री पर नीरज व जितेंद्र निजी अस्पतालों में नौकरी करते रहे। इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय को भेजे गए पत्र में एसटीएफ ने यह सवाल पूछा है। एसटीएफ अधिकारियों ने यह जानकारी मांगी है कि गलत लोगों को नौकरी देकर मरीजों की जान से खिलवाड़ की छूट देने वाले अस्पतालों पर क्या जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

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रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में पकड़े गए दो डॉक्टराें की डिग्री फर्जी मिली है। उनके विरुद्ध पृथक से कार्रवाई कर सीएमएचओ कार्यालय में पत्र भेजा गया है। निजी अस्पतालों को पंजीयन देते समय दस्तावेंजों की जांच की क्या प्रक्रिया है इसकी जानकारी लेकर जिम्मेदारों को भी प्रकरण में आरोपित बनाया जाएगा।

नीरज सोनी, एसपी

एसटीएफ

Posted By: Ravindra Suhane

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