अतुल शुक्ला, जबलपुर किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाने रेलवे ने किसान स्पेशल पार्सल ट्रेन चलाई है। सप्ताह में तीन दिन चलने वाली इस ट्रेन में किसान अपनी उपज (सब्जियां और फल) को तय किराए से 50 फीसद कम दामों पर बुक करके दूसरे शहर के बाजार तक पहुंचा सकता है, लेकिन इसके लिए किसान को माल लेकर अपने गांव से रेलवे स्टेशन तक आना ही होगा। इतना ही नहीं बुक करने के बाद मिलने वाली रसीद की मूल कापी, जिस व्यापारी के पास माल भेज रहे हैं, उसे तक पहुंचानी है, ताकि वह यह उपज उठा सके। इसे दिखाए बिना किसान की उपज स्टेशन से नहीं मिलेगी। इससे किसान की परेशानी और बढ़ गई है।

माल बुक करने-उठाने की प्रक्रिया लंबी: रेलवे की किसान स्पेशल पार्सल ट्रेन में माल बुक करने से लेकर माल उठाने तक की प्रक्रिया इतनी लंबी है कि किसान समझ ही नहीं पा रहे। भारतीय किसान संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राघवेंद्र पटेल कहते हैं कि किसान को समझ नहीं आ रहा कि वह अपने खेत से माल स्टेशन तक कैसे लाएगा और किस तरह से रसीद की मूल कापी दूसरे शहर में बैठे व्यापारी तक पहुंचाएगा। रेलवे के पार्सल विभाग की कार्यशैली अभी तक आनलाइन नहीं हुई है।

रेलवे के साथ जिला प्रशासन भी जुटा: ट्रेन की जानकारी अभी तक सब्जी और फल लगाने और बेचने वाले किसान और व्यापारी तक नहीं पहंुच पाई है। रेलवे इस काम में सफल नहीं रहा है, हालांकि अब जिला प्रशासन ने इसकी जिम्मेदारी ली है। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने अपने अधिकारियों को रेलवे के साथ मिलकर इस पर काम करने की जिम्मेदारी दी है। किसानों के मोबाइल नंबर पर ट्रेन की जानकारी भेजी जाएगी। बैठक और संगोष्ठी के दौरान इस ट्रेन का प्रचार भी होगा।

जबलपुर से मिर्ची और नींबू ही हो रहा बुक: ट्रेन में 22 कोच हैं, लेकिन जबलपुर से दानापुर और मुंबई रूट पर आने वाले दूसरे स्टेशन तक माल पहुंचाने की बुकिंग कम ही हुई है। अभी तक जबलपुर और नरसिंहपुर से मिर्ची और नींबू ही इलाहाबाद व नासिक भेजा गया। जानकारी के मुताबिक जबलपुर से मटर ट्रक के माध्यम से यूपी, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की मंडी जाता है। वहीं अमरूद और सीताफल यूपी और महाराष्ट्र जाता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इन्हें समय पर पहुंचाना जरूरी है, नहीं तो खराब होने की आशंका रहती है।

वर्जन

किसान पार्सल स्पेशल ट्रेन की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन हमारी मदद कर रहा है। ज्यादा से ज्यादा किसान अपनी उपज को इस ट्रेन से भेजे, इसलिए रेलवे हर संभव प्रयास करने में जुटा है।

विश्वरंजन, सीनियर डीसीएम

Posted By: Ravindra Suhane

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