Jabalpur News :जबलपुर (नई दुनिया प्रतिनिधि) । आपके क्षेत्र में नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। इससे आप हलकान हैं। इस असुविधा की शिकायत आप पहले चरण में स्थानीय पार्षद से, दूसरे चरण में नगर निगम आयुक्त से, तीसरे चरण में महापौर से, चौथे चरण में कलेक्टर और पांचवे चरण में संभागायुक्त से शिकायत कर सकते हैं। यदि इसके बाद भी शिकायत दूर न हो तो फिर आप पूर्व में सौंपी गई सभी शिकायतों की प्रतियों को संलग्न कर हाई कोर्ट में जनहित याचिका यानि पीआईएल दायर करने स्वतंत्र हैं। आप अपने मामले की स्वयं पैरवी कर सकते हैं, इसके लिए अधिवक्ता नियुक्त करना अनिवार्य नहीं है। हाई कोर्ट मामले की सुनवाई के बाद समुचित दिशा-निर्देश जारी करेगा, जिससे समस्या का समाधान होना तय है।

उक्त विधिक परामर्श सोसायटी फार लीगल एड एंड ज्यूडिशियल रिफॉर्म के प्रेसीडेंट व डेमोक्रेटिक लॉयर्स फोरम के सचिव अधिवक्ता रविंद्र गुप्ता ने हैलो नईदुनिया कार्यक्रम में कांचघर निवासी राहुल ठाकुर के सवाल के जवाब में दिया।

इस कड़ी में शहर के अलग-अलग इलाकों से एक के बाद एक सवाल सामने आए, जिनके वैधानिक परामर्श वाले संतोष परक जवाब दिए गए।

सवाल : चार साल पहले शादी हुई थी। पति मारपीट करता है। इसलिए तलाक का केस दायर कर दिया है। खाना-खर्चा नहीं मिल रहा है। इस वजह से दो साल से परेशान हूं। क्या करूं।

-रंजना नायक, बरगी

जवाब : मप्र सरकार ने महिलाओं की शिकायतों के निराकरण के लिए वन-स्टेप सेंटर खोले हैं। जिनका प्रभारी मनोवैज्ञानिक व सामाजिक कार्यकर्ता होता है, जो निश्शुल्क विधिक सहायता देता है। वहां जाकर अपनी शिकायत दें। विस्तार से पूरी समस्या बताएं। खाना-खर्चा न मिलने की शिकायत बिना कोर्ट जाए दूर हो जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि वन-स्टेप सेंटर को सरकार की ओर से विशेष अधिकार व शक्ति दी गई है।

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सवाल : बैंक में लोन के लिए एप्लाई किया था। लेकिन मनमाने तरीके से लोन देने से मना कर दिया गया। लिहाजा, लोन न दिए जाने के कारण के सिलसिले में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई। सूचना अधिकारी ने जानकारी नहीं दी। अब क्या करूं।

-कमलकांत वर्मा, प्रेम सागर

जवाब : आप 30 दिन में बैंक के पोर्टल में आनलाइन अपील दायर कर सकते हैं। यदि इसके बाद भी सूचना के अधिकार का उल्लंघन करते हुए अपेक्षित जानकारी न दी जाए तो फिर आप केंद्रीय सूचना आयोग में आनलाइन सेकेंड अपील दायर करें। वहां से न केवल आपकी शिकायत दूर होगी और अपेक्षित जानकारी मिलेगी बल्कि मनमानी करने वाले बैंक अधिकारियों पर जुर्माना भी लगेगा।

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सवाल : पत्नी ने मायके जाकर मेरे विरुद्ध प्रताड़ना की झूठा शिकायती आवेदन दे दिया है। लिहाजा, छतरपुर से पुलिस के फोन आते हैं। मेरी नींद खराब हो गई है। जबकि प्रताड़ना जैसी कोई बात नहीं थी, पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद व नोंकझोंक कोई अपराध तो नहीं है। अब क्या करूं।

-प्रशांत कुमार, रांझी

जवाब : आप बिना देर किए छतरपुर के एसपी को ई-मेल से सारी वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए अपनी शिकायत भेज दें। उसकी एक प्रति जबलपुर एसपी को भी भेजें। साथ ही महिला थानों को भी शिकायत दे दें। जिसमें निवेदन करें कि मुझे पत्नी द्वारा झूठा फंसाया गया है। लिहाजा, पूरे मामले की पारदर्शी तरीके से निष्पक्ष जांच किए बिना एकपक्षीय तरीके से मेरे विरुद्ध एफआइआर दर्ज न की जाए। ऐसा होने पर मैं अदालत की शरण लूंगा। निस्संदेह पुलिस के उच्च अधिकारी इस शिकायत पर संज्ञान लेंगे। मामला परिवार परामर्श केंद्र भेजकर सुलह करा दी जाएगी।

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सवाल : मेरी सहेली पसंद के एक तलाकशुदा युवक से शादी करना चाहती है। लेकिन उसके माता-पिता अनुमति नहीं दे रहे हैं। मुझसे सलाह मांग रही है। उसे क्या सलाह दूं।

-नेहा राकेश, जगदंबा कालोनी

जवाब : आपकी सहेली और वह तलाकशुदा युवक मिलकर कलेक्ट्रेट जाएं। वहां 100 रुपये का चालान कटवाकर आवेदन प्राप्त करें। बिना किसी वकील की सहायता के यह प्रक्रिया निजी स्तर पर पूरी की जा सकती है। इसके दूसरा खर्च नहीं आता। आवेदन देने के बाद कोर्ट मैरिज का रास्ता साफ हो जाएगा। अपने साथ तीन गवाह ले जाएं, जिनके आधार कार्ड कर प्रतिलिपियां आवेदन के साथ संलग्न करनी होंगी। यकीन मानिए आवेदन पर आपत्ति के बावजूद कोर्ट मैरिज होकर रहेगी। बशर्ते दोनों में से कोई पागल न हो, पहले से विवाहित न हो और दोनों के बीच रक्त संबंध न हो।

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सवाल : मेरा मित्र इंजीनियर है। वह एक बिल्डर के यहां नौकरी करता था। जिसने जबरन रिजाइन करवाकर नौकरी से निकाल दिया। यहां तक कि तीन माह का वेतन तक दबा लिया है। अब क्या किया जाए।

-हरिशंकर गुप्ता, साकेत नगर

जवाब : अपने मित्र को सलाह दीजिए कि वह नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल के पोर्टल पर आनलाइन शिकायत करे। इसके साथ ही सहायक श्रमायुक्त के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत करेे। यदि इससे हल न निकले तो औद्योगिक विवाद अधिनियम के अंतर्गत केस दायर करने का विकल्प भी खुला है। केस जीतने पर न केवल तीन माह का तीन गुना वेतन मिलेगा बल्कि दूसरे लाभ भी मिलेंगे। यही नहीं वेतन रोकने व मनमाने तरीके से नौकरी से निकालने वाले नियोक्ता को छह माह की जेल व जुर्माना दोनों हो सकता है।

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सवाल : एक महिला जो मेरी रिश्तेदार है, मुझे धमकी दे रही है कि मेरे विरुद्ध दुष्कर्म की एफआइआर दर्ज करा देगी। दरअसल, हमारे बीच जमीनी विवाद है, जिसमें जीतने के लिए वह यह तरीका अपनाना चाह रही है। अब क्या करूं।

-विजय पांडे, भेड़ाघाट

जवाब : आप शीघ्र ही एक विस्तृत शिकायत बनाकर पुलिस अधीक्षक को सौंप दें। जिसकी प्रतिलिपि भेड़ाघाट थाना प्रभारी को भी दें। जिसमें यह मांग करें कि मेरे विरुद्ध दुष्कर्म के आरोप की कोई शिकायत आए तो बिना जांच किए अपराध पंजीबद्ध न किया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि विवाद सिविल का है, जिसे क्रिमनल रंग देने की साजिश का अंदेशा है। पुलिस इस शिकायत पर अवश्यक संज्ञान लेगी और झूठी महिला की चाल नाकाम हो जाएगी।

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सवाल : अविवाहित वृद्ध हूं। मेरी 30 साल पहले विवाहित बहनों ने मेरी जमीन हड़पने के लिए मुकदमा लगा दिया है। यदि जमीन हाथ से चली गई तो वृद्धावस्था में परेशानी हो जाएगी। क्या करूं।

-नारायण पांडे, बेनीखेड़ा

जवाब : आप जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जाएं। वहां आपकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। निश्शुल्क विधिक सहायता मिलेगी। जिससे बहनों द्वारा दायर मुकदमें में आपकी ओर से मजबूती से पक्ष रखा जा सकेगा। आपकी बहनें आपके हिस्से की जमीन अपने नाम कराने की साजिश में सफल नहीं होंगी। कानून आपकी मदद करेगा।

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सवाल : मेरे पड़ोसी ने मेरी जमीन पर अतिक्रमण कर लिया है। वह विरोध करने पर झगड़ा करने पर उतारू हो जाता है। क्या करूं।

-दयाशंकर सेन, कुंडम रोड पिपरिया

जवाब : आप भूराजस्व संहिता की धारा-250 के अंतर्गत तहसीलदार के समक्ष शिकायत करें। सीआरपीसी की धारा-145 के अंतर्गत एसडीएम के समक्ष शिकायत करें। आपकी जमीन का सीमांकन कराने के निर्देश जारी होंगे। जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। यदि पड़ोसी आपके हिस्से की जमीन पर काबिज पाया गया तो उसे बेदखल कर दिया जाएगा।

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सवाल : केंद्रीय विद्यालय से सेवानिवृत्त हूं। अविवाहित हूं। भतीजे के बच्चों को गोद लिया है। चाहता हूं कि जब तक जिंदा हूं, संपत्ति का मालिक बना रहूं। ताकि सेवा होती रहे। मृत्यु के बाद संपत्ति भतीते के बच्चों की हो जाए। क्या करूं।

-श्यामलाल, सुहागी

जवाब : आप किसी वकील की सहायता से पंजीकृत वसीयत तैयार करवा सकते हैं। जिसमें यह शर्त लिखी होगी कि आपकी मृत्यु के बाद ही संपत्ति वारिसों की होगी। लेकिन यदि बीच में आप चाहें तो इस वसीयत को निरस्त भी कर सकते हैं। इस शर्त के कारण आपकी सेवा निरंतर होती रहेगी।

Posted By: Jitendra Richhariya

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