जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सवाल खड़ा किया गया कि जब जबलपुर पुलिस ने आकाश गोस्वामी के विरुद्ध एफआइआर दर्ज की थी तो फिर आकाश स्वामी को कैसे गिरफ्तार कर लिया। यही नहीं अपराध में जिस वाहन का इस्तेमाल दर्शाया गया वह अस्तित्व में ही नहीं है। अब कई माह गुजरने के बाद पुलिस आकाश स्वामी पर दबाव बना रही है कि वह कोई वाहन पेश करे। ऐसा न किया तो किसी दूसरे मामले में फंसा देंगे। जेल भेज देंगे। एक अन्य आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि जिस दिन अपराध दर्ज किया गया उस दिन आकाश स्वामी जबलपुर में था ही नहीं।

इस मामले में हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी की एकलपीठ ने बरेला थाना व प्रेमसागर पुलिस चौकी पर प्रताड़ना के आरोप संबंधी याचिका को गंभीरता से लिया। इसी के साथ शासकीय अधिवक्ता जीके पटेल को निर्देश हासिल कर अवगत कराने की जिम्मेदारी सौंप दी। इसके अंतर्गत चालान की स्थिति सहित अन्य तथ्यों के बारे में जानकारी पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 11 अक्टूबर वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है।

याचिककर्ता प्रेमसागर, जबलपुर निवासी आकाश स्वामी की ओर से अधिवक्ता ओमशंकर विनय पांडे व श्रीमती अंचन पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता को बरेला थाना व प्रेमसागर पुलिस चौकी के पुलिस कर्मी व अधिकारी परेशान कर रहे हैं। शारीरिक व मानिसक प्रताड़ना दी जा रही है। बार-बार थाने व चौकी बुलाया जाता है, इस दौरान तरह-तरह के सवाल किए जाते हैं। इससे पूरा परिवार तनाव में आ गया है। दरअसल, दुर्भावनावश आबकारी एक प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था। उस मामले में याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। जिसके पालन में 2021 में बरेला पुलिस ने याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा कर दिया। लेकिन वर्ष गुजरने आया पुलिस ने उस मामले में चालान की स्थिति स्पष्ट नहीं की है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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