जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े में फंसे द बोर्ड आफ एजुकेशन चर्च आफ नार्थ इंडिया जबलपुर डायोसिस के पूर्व चेयरमैन व पूर्व बिशप पीसी सिंह ने स्कूल और सोसायटियों से मिली रकम को हड़पने के लिए अपना स्वयं का जरोहा नाम से एक ट्रस्ट बना रखा था। इसमें पीसी सिंह ने अपनी पत्नी नोरा सिंह, बेटा पीयूष पाल सिंह और बेटी प्रियंका सिंह को ट्रस्टी बनाया हुआ था।

यह ट्रस्ट उसके कटंगा वाले एक पुराने घर से संचालित किया जाता था। इस बात का खुलासा ईओडब्ल्यू की जांच में हुआ। वहीं गुरुवार को ईओडब्ल्यू के विवेचना अधिकारी ने भोपाल पहुंचकर मामले से जुड़े दस्तावेज ईडी को सौंप दिए हैं।

ट्रस्ट के माध्यम से पैसा आने की आशंका

ट्रस्ट के संबंध में पता चलने के बाद ईओडब्ल्यू ने ट्रस्ट से जुड़े सभी दस्तावेज और आय-व्यय का लेखा जोखा की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। ईओडब्ल्यू को आशंका है कि पूर्व बिशप पीसी सिंह द्वारा स्कूलों और सोसायटियों से डोनेशन के नाम पर जो राशि ली जाती थी, उसे खपाने का काम इस ट्रस्ट के माध्यम से किया जाना हो सकता है। पता चला है कि इस ट्रस्ट में रकम आने के बाद पीसी सिंह उस रकम को अन्य धार्मिक संस्थाओं को भेजता था और खुद भी इसका उपयोग करता था। बताया जा रहा है कि यह ट्रस्ट केवल कागजों में ही संचालित था। ट्रस्ट कब और क्यों बनाया गया था, इसका पूरा ब्यौरा ईओडब्ल्यू की टीम जुटा रही है।

ईडी ने शुरू की दस्तावेजों की जांच

बताया जा रहा है कि ईडी ने पूर्व बिशप पीसी सिंह से जुड़े मामले के दस्तावेजों के साथ ईओडब्ल्यू के विवेचना अधिकारियों को बुलाया था। जिस पर विवेचना अधिकारी गुरुवार को भोपाल के ईडी कार्यालय पहुंचे। बिशप के यहां से जब्त किए गए दस्तावेज और अब तक की कार्रवाई से जुड़े अन्य सबूतों की एक प्रति ईडी को सौंपी गई है। ईडी के अधिकारियों ने गुरुवार से ही दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।

दो और प्राचार्यो से की गई पूछताछ

ईओडब्ल्यू के समक्ष गुरुवार को दमोह के दो अन्य स्कूलों के प्राचार्य पेश हुए। यह भी उन्हीं स्कूलों के प्राचार्य हैं, जिनका संचालक पूर्व बिशप पीसी सिंह की अधीनस्थ संस्था सीएनआइ द्वारा किया जाता था। टीम दोनों प्राचार्यो से घंटों पूछताछ करती रही। पूछताछ में ईओडब्ल्यू अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास करते रहे कि वर्ष 2004 से अब तक स्कूल द्वारा किन-किन कारणों से पीसी सिंह को राशि पहुंचाई है। अब तक कितनी राशि दी गई है और राशि किस मद के परिपेक्ष्य में दी जाती थी। बताया जा रहा है कि इस संबंध में सुरेश जैकब से भी पूछताछ हुई है।

Posted By: Jitendra Richhariya

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