जबलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना महामारी ने अपनों को अपनों से ही दूर किया है। इस महामारी के दौरान लोगों ने अपनी जिंदगी को जिस तरह से जिया है। उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इस महामारी में लोगों के दोस्ती के रिश्ते को और भी बेहतर जिया है। कोविड वार्ड के बाहर खड़े दोस्त ने जहां देखरेख करने के साथ ही दोस्त के बच्चों को भी संभाला हो। एक फोन पर विदेश में बैठे दोस्त के माता-पिता को हॉस्पिटल पहुंचाया हो। कोविड पॉजीटिव परिवार के घर दिन में तीन बार खाना पहुंचाना। इन सभी मदद के लिए दोस्ती ही सबसे ज्यादा काम आई है। महामारी ने लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कष्ट दिया है, लेकिन दोस्ती के रिश्ते ने हर वक्त साथ देकर इस बीमारी को हराने की हिम्मत दी है। मानवता, सेवा भाव सब कुछ इस रिश्ते में ही देखने को मिला है। दोस्ती के लिए कोई एक दिन नहीं होता, लेकिन दोस्तों के नाम बने इस दिन को हर कोई एक अलग अंदाज में सेलिब्रेट करने को तैयार है। कोरोना महामारी में लोगों ने अपने कई रिश्तों की हकीकत जानी है, लेकिन एक दोस्ती का रिश्ता ही ऐसा रहा जिसे और भी गहरा किया है।

दोस्तों के लिए रहते हैं हमेशा तैयार: कोरोना के दौरान हमने हर किसी को परेशान देखा है, लेकिन देखा जाए तो इस महामारी ने दोस्तों की पहचान भी कराई है। डॉ.अर्पित शुक्ला ने बताया कि कोरोना के दौरान हर किसी की जिंदगी थम सी गई थी। जो विदेश में था वो वहीं रह गया। उनके बुजुर्ग माता-पिता की जरूरतों का ध्यान रखना, उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाने का काम किया। जिन लोगों को दवाईयों की जरूरत थी। उन तक दवाई पहुंचाई। ब्लड. प्लाज्मा, खाना ये सब कछ किया। ये सब दोस्ती के लिए किया। इस महामारी ने दोस्ती को और गहरा किया और अपनों के काम आने का मौका दिया है। ये रिश्ता बेहद खास होता है। जिसके लिए समय, हालात इनके बारे में नहीं सोचा जाता। बस मदद में काम आया जाता है।

खूबसूरत रिश्ता है दोस्ती: डॉ.अनुराग साहनी ने बताया कि कोरोना के दौरान अस्पताल से लेकर आसपास के परिवारों में देखा है कि दोस्ती क्या होती है। दोस्ती खूबसूरत रिश्ता है। यदि कोई इस महामारी में भी आपकी मदद के लिए आया है, तो वो सच्चा दोस्त है। जो इन हालातों में आपके लिए संघर्ष कर रहा है। कोरोना में लोगों ने अपनी दोस्ती का नया रूप देखा है। इस नए अहसास के साथ जिया है। जितना इलाज के लिए पैसों की जरूरत होती है, उससे कई ज्यादा किसी के साथ की जरूरत होती है। दोस्ती हमेशा से बेहतर रही है। इन्होंने बताया कि कोरोना जब बहुत ज्यादा था, तब दोस्त की मां को इलाज की जरूरत थी। तब उसके घर पर इलाज के लिए पहुंचे। ऐसे हालातों में दोस्त अपनी मां को लेकर कहां जाता। लोगों का इलाज करना फर्ज है, लेकिन दोस्ती निभाना भी फर्ज है। जिंदगी में दोस्तों के लिए खास जगह है।

Posted By: Ravindra Suhane

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