बातों के शेर तो बहुत सुने-देखे होंगे, लेकिन बात कहकर उस पर कायम रहने वाले शेर कम ही दिखते हैं। इन दिनों वेटरनरी विश्वविद्यालय में भी ऐसे ही एक शख्स की चर्चा हो रही है, जिसने अपनी मांग को पूरा कराने के लिए बड़े साहब को ही चुनौती दे दी। और तो और उसे पूरा भी करा लिया। हुआ यह है हाल ही में रीवा कालेज में भर्ती हुए एक प्रोफेसर साहब ने अपने स्थानांतरण की अर्जी बड़े साहब के पास लगाई। साहब ने इस अर्जी पर सुनवाई करने से पहले नियम-कानून को समझा और अंत में मना कर दिया। फिर क्या था प्रोफेसर साहब को ये बात जमी नहीं उन्होंने भरी मीटिंग में अपना स्थानांतरण हर हाल में कराने की दम दे दी। फिर इन साहब ने विवि के बड़े साहब को न जाने कितने साहबों से कहां-कहां से फोन लगवाया और अपना मनमर्जी का कालेज में स्थानांतरण करा लिया।

दावा का मिनरल-मिक्चर, नहीं हो पाया पूरा

कसमें, वादें, प्यार, वफा, सब वादें हैं वादों का क्या। भैया इस गाने को सुनकर हमें दुनियादारी की हकीकत का अहसास हो जाता है। वेटरनरी विश्वविद्यालय में भी इन ऐसे लोग हैं, जो अपना काम कसमें और वादों से करते हैं, पर उसे पूरा नहीं करते। एक साहब ने बड़े साहब के सामने अपने नंबर बढ़ाने के लिए ऐसे-ऐसे वादे कर दिए, जो एक साल बाद भी पूरे नहीं हो सके। इन वादों को उम्मीद पर डांगे ये साहब अपने सब काम करा रहे हैं। इन साहब ने एक ऐसी मशीन लगाने का वादा किया, जिससे शोध की दशा और दिशा, दोनों बदल जाती, लेकिन इस वादे का ऐसे मिनरल-मिक्चर बना किया कि हम इसे समेंटना भी मुश्किल हो रहा है। इधर विवि से कालेज की गलियों तक इन वादों और कसमों को लेकर तरह-तरह की बातें होने लगी। बड़े साहब भी इन वादों को पूरा हाेने की उम्मीद में आज भी बैठे हैं।

बड़े साहब के ड्राइवर ने खोली डेयरी

जबलपुर रेल मंडल के बड़े साहब के एक ड्राइवर के चर्चे इन दिनों मंडल से जोन तक के गलियों में खूब हो रहे हैं। ड्राइवर साहब ने अपने बड़े साहब की सादगी और ईमानदारी का पूरा उपभोग किया और दूसरों को दम दिखाकर रेलवे का क्वार्टर ले लिया। फिर धीरे-धीरे इन साहब ने अपने साथ क्वार्टर में एक-दो नहीं बल्कि दस से बारह गाय रखकर डेयरी ही खोल दी। बड़े साहब की नौकरी से जब भी वक्त मिला, इन्होंने उसका उपयोग डेयरी को विकास और गाय के स्वास्थ पर दिया। दिक्कत तब आई जब रेलवे ने उन क्वार्टर को तोड़ने का आदेश दिया, जहां डेयरी खोली गई थी। इन ड्राइवर साहब ने अपने बड़े साहब का नाम लेकर क्वार्टर पर ऐसा कब्जा किया कि आस-पास के सारे क्वार्टर टूट गए, लेकिन इनकी डेयरी का क्वार्टर नहीं टूटा। इसे तोड़ने के लिए तोड़ने वाले अब परेशान हो रहे हैं।

आखिर मिल की गई कुर्सी

जिला प्रशासन के सबसे ज्यादा कमाउ आबकारी विभाग की कुर्सी पर दो दावेदार, कई दिनों से अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे। एक दावेदार विभाग के आदेश पर कुर्सी पर सवार था तो दूसरा न्यायालय के निर्देश पर। एक कुर्सी के दो दावेदारों के बीच विभाग के अफसर और कर्मचारी काम पर डटे थे तो वहीं बड़े साहब भी इस पर कुछ कहने से बच रहे थे। आखिरकार दूसरे दावेदार जिस आदेश पर अपनी दावेदारी दे रहे थे, उस बदलते ही उन्हाेंने अपनी दावेदारी को बीच में छोड दिया। अब विभाग की ओर से दावेदारी करने वाले साहब को कुर्सी मिल गई है। इसके बाद काम और दाम, दोनों पर काम शुरू हो गया है, वो भी तेज गति से। हालांकि पुराने साहब ने नए साहब और उनसे जुड़े कई किस्से विभाग से लेकर प्रशासन के दूसरे विभागों तक फैला दिए हैं, जिससे यह साहब खासे नाराज हैं।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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