जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में कहा गया कि हर नागरिक को सरकार शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। इस वजह से बड़ी संख्या में लोगों और पशुओं के जीवन व स्वास्थ्य प्रभावित हो रहे हैं। सरकार को निर्देश दिए जाएं कि हर नागरिक को जीवन जीने के मौलिक अधिकार के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। जस्टिस एमएस भट्टी व जस्टिस पीसी गुप्ता की अवकाशकालीन बेंच ने गुरुवार को तत्काल सुनवाई से इंकार कर दिया। कोर्ट ने अवकाश के बाद मामले की सुनवाई 13 जून वाले सप्ताह में करने के निर्देश दिए।

वॉक एंड क्लीन सोसायटी जबलपुर के सचिव अधिवक्ता अरविंद दुबे की ओर से याचिका दायर की गईं। अधिवक्ता अमित सिंह, नितिन सिंह ने कोर्ट को बताया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को मानवोचित गरिमा व सम्मानपूर्वक जीवन जीने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। इसके तहत हर नागरिक को शुद्ध और पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध कराना राज्य सरकार का दायित्व है। लेकिन प्रदेश में भीषण जलसंकट है। ग्रामीण इलाकों में तो इतनी किल्लत है कि किलोमीटरों दूर से लोग पीने का पानी ढोने को विवश हैं। मीडिया में प्रकाशित विभिन्न ऐसे समाचारों का हवाला देते हुए कहा गया कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पा रही है। शहरी क्षेत्रों में भी आए दिन जलसंकट की खबरें सामने आती रहती हैं। याचिका में केंद्रीय जल संसाधन, वन एवं पर्यावरण, रेलवे व राज्य सरकार के पर्यावरण, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, पीएचई व एनवायरमेंट प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन ऑर्गेनाइजेशन भोपाल को पक्षकार बनाया गया।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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