जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। भारी आवाज में थोड़ा सकुचाते हुए कहा कि मेरे पापा हाथ रिक्शा चालक थे, यह कहते हुए अचिंता का गला रूंध गया। अचिंता कोई और नहीं बल्कि बर्मिंघम में आयोजित कामनवेल्थ गेम्स 2022 के स्‍वर्ण विजेता है। अचिंता शेउली ने भारोत्तोलन के 73 किलोग्राम भार-वर्ग में भारत की ओर से हिस्सा लेते हुए प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक हासिल किया। अचिंता ने नईदुनिया से बातचीत के दौरान बताया कि यहां तक पहुंचने के लिए उसने तो कड़ी मेहनत की ही है, साथ ही बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्होंने उसके सपने को पूरा करने के लिए अपने भविष्य का गला घोंट दिया।

अचिंता ने बताया कि वो पश्चिम बंगाल स्थित हावड़ा के देउलपुर का रहने वाला है। हावड़ा में उसके पिता जगत शिउले हाथरिक्शा चलाते थे। पिता की हांड़तोड़ मेहनत और मां के दुलार ने अचिंता और उसके बड़े भाई आलोक शेउली को कभी किसी बात की कमी नहीं होने दी। अचिंता का बड़ा भाई आलोक भी आला दर्जे का वेटलिफ्टर रहा। 2013 के पहले वो भी नेशनल लेबल तक खेल चुका था। इसी बीच अचिंता को भी वेटलिफ्टिंग का जुनून सवासर हुआ और वो भी इसमें हाथ आजमाने लगा, लेकिन इसी बीच अचिंता के पिता जो परिवार की धुरी थे उनका निधन हो गया। शेउली परिवार पर अचानक आई इस आपदा ने सब कुछ उलट-पलट कर रख दिया। अचिंता के बड़े भाई आलोक ने परिवार को दो जून की रोटी उपलब्ध कराने व अचिंता का सपना पूरा करने के लिए खेलकूद त्याग दिया। अब उसका सपना रहा अचिंता को एक बेहतर वेटलिफ्टर बनाना, इसलएि उसने हावड़ा नगर निगम में ही फायर फाइटर के रूप में काम करना शुरू कर दिया।

अचिंता ने भी कड़ी मेहनत की

इधर अचिंता को भी भाई के त्याग और समर्पण का भली -भांति अंदाजा रहा। इसलिए उसने खेल के साथ ही पढ़ाई भी मन लगाकर की और सफलता के इस सोपान तक पहुंचने से पहले वह सेना में हवलदार बन चुका था। वो वन टीटीआर के वन एसटीसी में पदस्थ है। अचिंता ने बताया कि उसे अपने बड़े भाई के सपनों का झुलसना बहुत विचलित करता है। वो अपने भाई के त्याग का बड़ा सम्मान करता है।

Posted By: Jitendra Richhariya

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