रामकृष्ण परमहंस पांडेय, जबलपुर। रानी दुर्गावती चिकित्सालय एल्गिन में व्यवस्थाओं को लकवा लग गया है। प्रसव पीड़ा से कराहती महिलाओं को दर-दर भटकना पड़ रहा है तथा स्वजन स्ट्रेचर खींचने के लिए मजबूर हैं। चिकित्सक कक्ष से लेकर जांच केंद्रों तक हर जगह गर्भवती महिलाओं की लंबी कतार लगी रहती है। कतार में खड़े-खड़े महिलाएं थककर फर्श पर बैठ जाती हैं। एल्गिन अस्पताल में ऐसे द्श्य दिल को झकझोर कर रख देते हैं। इन दिनों सुरक्षित मातृत्व व शिशु की सुरक्षा की थीम पर मरीज सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी शिशु एवं मातृत्व कल्याण इकाई का दर्जा प्राप्त एल्गिन में स्वास्थ्य सेवाओं की यह हालत चिंताजनक है। हालांकि बीते कुछ वर्षों में अस्पताल में रोगी सुविधाएं आधुनिक की गई हैं। परंतु ज्यादातर कर्मचारियों को मूल कार्य से अलग अन्य जिम्मदारियां सौंप दी गई हैं। इसलिए मरीज, स्वजन व आशा कार्यकर्ताओं को परेशान होना पड़ता है।

ओपीडी में जगह की कमी, हर जगह कतार: मरीज सुरक्षा सप्ताह मनाने के पीछे सरकार का उद्देश्य यह है कि अस्पतालों में मरीजों को परेशानी से बचाया जा सके। परंतु एल्गिन में हालात कुछ और हैं। ओपीडी में जगह की कमी पड़ने लगी है। गर्भवती महिलाअों को लंबे समय तक कतार में खड़े रहना पड़ता है। सोनोग्राफी कक्ष, पैथालाजी, चिकित्सक कक्ष, इंजेक्शन कक्ष हर जगह महिलाएं कतार में खड़ी रहती हैं। मंगलवार को एल्गिन में कायाकल्प अवार्ड के लिए राज्य स्तरीय टीम का दौरा चल रहा था। पूर्व में इस अभियान में देश व प्रदेश में नाम कमा चुके एल्गिन अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को कतार में खड़े होने से राहत नहीं मिली।

प्रसव बरेला में, खून चढ़ा एल्गिन में, अब डिस्चार्ज कार्ड के लिए भटकाव: नर्रई बरगी निवासी रानू धुर्वे के स्वजन मंगलवार को एल्गिन अस्पताल में डिस्चार्ज कार्ड के लिए भटक रहे थे। 28 अगस्त को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरेला में रानू ने सामान्य प्रसव से शिशु को जन्म दिया था। प्रसव उपरांत रानू को खून चढ़ाने के लिए एल्गिन अस्पताल रेफर कर दिया गया था। स्वजन ने बताया कि अस्पताल में खून चढ़ाया गया था। इसी बीच परिवार में किसी की मौत हो गई जिसके चलते रानू को लेकर वे घर चले गए थे। घर जाने से पूर्व स्वास्थ्य कर्मचारियों को स्वजन के निधन की जानकारी दे दी थी। डिस्चार्ज कार्ड न मिलने के कारण नवजात शिशु का जन्म प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है। अस्पताल में चक्कर लगाते-लगाते स्वजन थक चुके हैं परंतु सुनवाई नहीं हो रही है। कर्मचारियों से संपर्क करने पर कोई कहता है इस कक्ष में जाओ तो कोई उस कक्ष में भेज देता है।

छठवें माह मेें सोनोग्राफी होनी थी, प्री मेच्योर शिशु की मौत हुई: गर्भधारण से लेकर प्रसव व उसके बाद भी महिलाओं की सेहत की रक्षा के लिए लागू योजनाएं दम तोड़ रही हैं। कटंगी बाइपास औरिया निवासी रंजीता रैकवार 25 वर्ष के गर्भ में पल रहा शिशु इसी तरह की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। रंजीता ने सोमवार दोपहर सामान्य प्रसव से बेटे को जन्म दिया था। सातवें माह जन्म लिए शिशु का वजन महज डेढ़ किलोग्राम के आसपास था। नवजात शिशुओं की गहन चिकित्सा इकाई एसएनसीयू में उपचार के बावजूद उसकी जान नहीं बच पाई। स्वजन ने बताया कि गर्भधारण के पहले माह वे रंजीता को लेकर एल्गिन अस्पताल आए थे। चिकित्सक ने बताया था कि छठवें माह सोनोग्राफी जांच की जाएगी। चौथे माह आशा कार्यकर्ता के साथ रंजीता दूसरी बार एल्गिन पहुंची थी। तब भी सोनाेग्राफी जांच नहीं की गई। सातवें माह प्रसव पीड़ा होने पर उसे एल्गिन लाया गया जहां जन्म लिए शिशु की मौत हो गई।

दो जिलों में भटकाव, एल्गिन में बेंच पर कराह, खून लाओ तब भर्ती: 22 साल की नेहा सिंगरोरे को मंडला के बाद जबलपुर में भी परेशान होना पड़ा। आशा कार्यकर्ता उमा सिंगरोरे के साथ स्वजन नेहा को लेकर मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे एल्गिन अस्पताल पहुंचे। स्वजन को अस्पताल के भीतर प्रवेश नहीं दिया गया तथा आशा कार्यकर्ता उसे भर्ती कराने के लिए भटकती रही। आशा कार्यकर्ता ने बताया कि नेहा को सोमवार को शासकीय स्वास्थ्य केंद्र निवास में भर्ती कराया गया था। खून में हीमोग्लोबिन की कमी बताकर मंगलवार को उसे एल्गिन रेफर कर दिया गया। स्वजन को अस्पताल के भीतर प्रवेश न मिलने पर वह नेहा को लेकर आकस्मिक चिकित्सा कक्ष पहुंची फिर पंजीयन कराने चली गई। पंजीयन उपरांत चिकित्सक ने कुछ जांचें लिख दीं। प्रसव पीड़ा से कराहती नेहा को लेकर वह पैथालाजी गई। जिसके बाद आकस्मिक चिकित्सा कक्ष के बाहर बेंच पर लिटा दिया और रिपोर्ट के लिए भटकने लगी। रिपोर्ट मिली तो चिकित्सक ने कहा कि पहले खून का इंतजाम कराे तब मरीज को भर्ती करेंगे।

आया-वार्ड ब्वाय को मजा, स्वजन व सफाई कर्मियों को सजा: गोकलपुर रांझी निवासी सत्यम केवट को रेलिंग विहीन स्टेचर स्वयं चलाना पड़ा। प्रसव उपरांत मंगलवार दोपहर उनकी पत्नी पिंकी केवट को अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। सत्यम ने बताया कि वार्ड में कर्मचारी नहीं मिले इसलिए उन्होंने स्ट्रेचर खींचकर पत्नी को बाहर लाने का निर्णय लिया। तेंदूखेड़ा निवासी प्रियंका शर्मा को प्रसव उपरांत एल्गिन अस्पताल से छुट्टी दी गई तो ठेका सफाई कर्मचारी रजनी गोंटिया को स्टेचर खींचना पड़ा। प्रियंका को भी वार्ड में स्ट्रेचर चलाने के लिए आया अथवा वार्ड ब्वाय नहीं मिले।

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एल्गिन अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किया गया है। मरीजों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े इसके पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। गर्भवती महिलाओं की बैठक व्यवस्था के इंतजाम किए गए हैं। फिर भी कुछ कमियां सामने आती हैं तो उनका निराकरण किया जाएगा।

डॉ. संजय मिश्रा, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं

Posted By: Ravindra Suhane

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