जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व में एक अंतरिम किंतु अहम आदेश देते हुए राज्य सरकार को कहा था कि हाई स्कूल शिक्षकों के पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी वर्ग को 14 फीसद से अधिक आरक्षण का लाभ नहीं देना है। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विजय शुक्ला की खंडपीठ ने इस मामले में प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, आयुक्त लोक शिक्षण और व्यापमं के चेयरमैन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसी मामले की छह दिसंबर को सुनवाई है।

मप्र के प्रबल प्रताप सिंह समेत राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सामान्य वर्ग के 11 उम्मीदवारों ने सरकार के उस अध्यादेश को चुनौती दी थी जिसमें उक्त भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया है। सरकार की दलील है कि पूर्व में महाधिवक्ता के द्वारा दिए गए ओपीनियन के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। सरकार ने 2 सितंबर 2021 को यह अध्यादेश जारी किया था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्‍ता आदित्य संघी ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने 1992 में इंदिरा साहनी के प्रकरण में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरक्षण का कुल प्रतिशत 50 से अधिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी हाईकोर्ट ने इस तरह के अन्य प्रकरणों में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर रोक लगाई है। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके वर्मा ने पक्ष रखा।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश देते हुए इस याचिका को पू्र्व में दाखिल याचिकाओं के साथ संलग्न करने के निर्देश भी दिए थे। सभी याचिकाओं पर सुनवाई आज होनी है।

Posted By: Ravindra Suhane

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