जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि।साइकिलिंग को बढ़ावा देने के मकसद से भारत सरकार द्वारा आयोजित साइकिल फार चेंज अभियान में जबलपुर स्मार्ट सिटी ने स्पेशल ज्यूरी अवार्ड हासिल करने में तो कामयाब रहा। लेकिन जमीनी हकीकत में शहर के नागरिक खुलकर साइकिलिंग ही नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि शहर में गिने-चुने जो साइकिल ट्रैक बनाए गए थे वे भी सही सलामत नहीं बचे हैं। पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने के साथ ही नागरिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए शहर में साइकलिंग को बढ़ावा देने की गई सारी कवायदें बेमानी साबित हो रही है। जबकि साइकलिंग को प्रोत्साहित करने के लिए स्मार्ट सिटी जबलपुर ने ढेरों रैलियां की, वेबिनार किए, ड्राइंग व अन्य प्रतियोगिताएं भी आयोजित कर चुका है।

करोड़ो किए खर्च हाथ हाथ आया शून्य

जबलपुर में पहले पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल पर हैक्सी साइकिल प्रोजेक्ट शुरू किया गया। तकरीबन 12 करोड़ रुपये खर्च कर साइकिल चलाने ट्रैक भी बनवाए गए। लेकिन नगर निगम और स्मार्ट सिटी की उदासीनता व अनदेखी के चलते हैक्सी साइकिल प्रोजेक्ट जहां शुरू होने के कुछ माह बाद ही ठप हो गया। वहीं जिम्मेदारों के देखरेख के अभाव में साइकिल ट्रैक भी बद्हाल हो गए। कंटगा से लेकर ग्वारीघाट तक तकरीबन चार करोड़ रुपये खर्च कर बनाया गया करीब साढ़े पांच किमी लंबा साइकिल ट्रैक जगह-जगह से उधड़ गया वहीं रही-सही कसर अतिक्रमणकारियों ने पूरी कर दी। वहीं स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मदनमहल भातखंडे संगीत विद्यालय से नवभारत तक 7 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा नान मोटराइज्ड ट्रैक पांच वर्ष बाद भी नहीं बन पाया है। मसलन नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने साइकलिंग के नाम पर खर्च तो करोड़ों रुपये किए लेकिन काम कुछ नही पा रहा।

साइकिलों का शहर रहा है जबलपुर

हैक्सी साइकिल प्रोजेक्ट बंद होने का मामला हाईकोर्ट तक जा पहुंचा था। जबलपुर के नयागांव हाउसिंग सोसायटी निवासी रजत भार्गव की ओर से याचिका दायर कर अधिवक्ता आदित्य संघी ने अवगत कराया था कि 40 साल पहले 1980 में जबलपुर शहर में सबसे ज्यादा साइकिलें चला करती थी। एक दावे के मुताबिक उस समय जबलपुर विश्व में सबसे ज्यादा साईकलों वाला शहर हुआ करता था। उस दौरान ट्रैफिक की समस्या नहीं थी। साइकिलों का उपयोग कम होते ही शहर में ट्रैफिक की समस्या विकराल होती जा रही है।

कोरोनाकाल में जमकर बिकी साइकिलें, अब भी है क्रेज

शहर में एक बार फिर साइकिलिंग का क्रेज बढ़ रहा है। सेहत को लेकर फ्रिकमंद लोग जहां भागदौड़ जिंदगी में तनाव व मोटापा कम करने साइकिल चलाना पसंद कर रहे हैं। वहीं प्रतियोगिता में भाग लेने वाले भी प्रेक्टिस करते देखे जा रहे हैं। कोरोना काल में भी खूब साइकिलें बिकी। कोरोना संक्रमण के समय अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जबलपुर में साइकिलिंग को तवज्जो दी। लेकिन अब जब लोग साइकिल के लिए जागरुक हो चुके हैं तब शहर के साइकिल ट्रैक ही गायब हो गए हैं।

ऐसे निकली हेक्सी साइकिल प्रोजेक्ट की हवा

शहर मे साइकिलिंग को बढ़ावा देने के मकसद से स्मार्ट सिटी जबलपुर ने अक्टूबर 2018 में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए हेक्सी साइकिल प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसके लिए जबलपुर में करोड़ों रुपये खर्च कर 45 साइकिल स्टेशन व कियोस्क बनाए गए थे। पूरा सिस्टम आनलाइन था। प्रोजेक्ट के तहत ये सुविधा थी कि साइकिल प्रेमी मोबाइल एप के माध्यम से साइकिल का लाक खोलकर उसका उपयोग कर सकते थे और किसी भी साइकिल स्टेशन पर साइकिल वापस रख सकते थे। इसका शुल्क भी काफी कम रखा गया था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य था कि लोग ज्यादा से ज्यादा साइकिल का उपयोग करें, ताकि शहर में ट्रैफिक जाम से बचा जा सके। लेकिन नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारियों की लापरवाही से प्रोजेक्ट की हवा निकल गई। साइकिल ट्रैक जगह-जगह उथड़ गए। चाय और पान के टपरे लग गए। कुछ माह बाद ही कंपनी ने प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए और प्रोजेक्ट बंद हो गया। जो साइकिल स्टेशन बनाए उनका स्ट्रेक्चर भी चोरी हो गया।

करोड़ों के साइकिल ट्रैक बदहाल

कटंगा क्रासिंग से ग्वारीघाट तक करीब तीन साल पहले बनाया गया ट्रैक बदहाल हो गया है। ट्रैक के कुछ हिस्से में जहां गड्ढे हो गए हैं, वहां लग्जरी कारें और दो पहिया वाहन खड़े होने लगे हैं। ग्वारीघाट जाने वाले श्रद्धालुओं के पैदल चलने के लिए बनाए गए पाथवे में भी दुकानदारों का कब्जा हो गया है। यह ट्रैक 4 करोड़ रुपये खर्च कर बनावाया गया था। इसकी लंबाई करीब साढ़े पांच किमी है

Posted By: Shivpratap Singh

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