जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर विरोध व समर्थन में चयनित शिक्षकों की ओर से दायर 63 याचिकाओं की सुनवाई 22 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी है। पूर्व निर्धारित व्यवस्था के तहत मंगलवार को इस मामले की सुनवाई प्रशासनिक न्यायाधीश शील नागू व न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह की युगलपीठ के समक्ष होनी थी, लेकिन प्रशासनिक न्यायाधीश शील नागू की युगलपीठ न्यायमूर्ति द्वारकाधीश बंसल के साथ होने के कारण रेगुलर बेंच के अभाव में इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ द्वारा दी गई व्यवस्था के तहत यह मामला उसी विशेष युगलपीठ में सुना जाएगा जिसके सदस्य न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह होंगे। ओबीसी आरक्षण के समर्थन में दायर याचिकाकर्ताओं की ओर से उदय कुमार, रामभजन लोधी, परमानंद साहू, प्रशांत चौरसिया, विष्णु पटेल ने पक्ष रखा। ओबीसी आरक्षण के विरुद्ध दायर याचिकाओ में अंशुमान सिंह, आदित्य संघी ने व राज्य शासन की ओर से विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह व अतिरिक्त महाधिवक्ता जनरल आशीष बर्नार्ड हाजिर हुए।

सालिसिटर जनरल नहीं आए, 3500 पेज का शपथ पत्र पेश होगा :

विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक प्रसाद शाह ने अवगत कराया कि ओबीसी आरक्षण के समर्थन में याचिकाकर्ता अपाक्स द्वारा प्रस्तुत अंतिम स्तर के तर्क को पुष्ट करने के लिए 3500 पेज का अभिलेख संलग्न किया गया है। इस सिलसिले में शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा पूर्व में राज्य द्वारा सालिसिटर जनरल तुषार मेहता के आगमन के लिए समय चाहा गया था, लेकिन वे नहीं आए। उम्मीद है कि आगामी सुनवाई के दौरान उनकी मौजूदगी में राज्य की ओर से ओबीसी आरक्षण को लेकर पक्ष रखा जाएगा।

Posted By: tarunendra chauhan

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