जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने छिंदवाड़ा के पूर्व कांग्रेस विधायक गंभीर सिंह चौधरी की याचिका पर पूर्व निर्देश के पालन में जवाब पेश न किए जाने के रवैये को आड़े हाथों लिया। इसी के साथ राज्य शासन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना (कॉस्ट) लगा दिया। यह राशि हाई कोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा किए जाने की व्यवस्था दी गई है। हाई कोर्ट ने राज्य शासन को इस बात के लिए स्वतंत्र कर दिया है कि जिस जिम्मेदार व सक्षम अधिकारी ने हाई कोर्ट के निर्देश का समय पर परिपालन न करते हुए जवाब प्रस्तुत करने में लापरवाही बरती, उसके वेतन से जुर्माना राशि की कटौती की जा सकती है। इसी के साथ मामले की अगली सुनवाई एक दिसंबर, 2020 को निर्धारित कर दी गई है। आगामी सुनवाई तिथि तक केस डायरी की प्रस्तुति भी सुनिश्चित कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव व जस्टिस सुजय पॉल की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता गंभीर सिंह चौधरी की ओर से अधिवक्ता वरुण तन्खा ने पक्ष रखा। जबकि राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेंद्र यादव व शासकीय अधिवक्ता प्रकाश गुप्ता खड़े हुए। आपत्तिकर्ता का पक्ष अधिवक्ता राजेश चंद ने रखा।

पूर्व विधायक ने एसडीएम के मुंह पर पोती थी कालिख : यह मामला छिंदवाड़ा के पूर्व कांग्रेस विधायक गंभीर सिंह चौधरी की अग्रिम जमानत अर्जी से संबंधित है। आरोप है कि बाढ़ पीड़ितों की समस्या को लेकर राजनीतिक प्रदर्शन किया गया। इस दौरान एसडीएम के मुंह पर कालिख पोत दी गई। लिहाजा, पुलिस में प्रकरण कायम कराया गया। इसी मामले में गिरफ्तारी की आशंका के मद्देनजर अग्रिम जमानत अर्जी दायर की गई है। पूर्व में हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया। लेकिन राज्य की ओर से जवाब नदारद है।

Posted By: Sunil Dahiya

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस