जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर निवासी मोहम्मद अरशद हुसैन को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन्हें पूर्व में मिली जमानत निरस्त कर दी जाए? ऐसा इसलिए क्योंकि जमानत जिन शर्तों के तहत दी गई थी, उनका उल्लंघन होने की शिकायत सामने आई है। दूसरे पक्ष पीड़ित पत्नी जबलपुर निवासी शबेनूर का आरोप है कि शादी के बाद दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के जरिये परेशान किया गया। महिला थाने में शिकायत के बाद अपराध दर्ज किया गया। जिसके बाद से तरह-तरह से दबाव बनाने की कोशिश जारी है। यहां तक कि जमानत मिलने के बाद न केवल मामले को प्रभावित करने की कवायद की गई बल्कि अपराध की पुनरावृत्ति तक की हिमाकत की गई।

राजपत्रित अधिकारी है पति:

न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता शबेनूर का पक्ष अधिवक्ता अमानुल्ला उस्मानी ने रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता का पति ओएफके, जबलपुर में राजपत्रित अधिकारी है। इसके बावजूद उसने शादी के बाद अपनी पत्नी को कम दहेज लाने सहित अन्य लांछन लगाकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। कोरोना लाकडाउन अवधि में 10 मई, 2020 को विवाह हुआ था। जिसके कुछ दिन बाद से ही विवाद शुरू हो गया। जब मामला थाना और अदालत पहुंच गया तो पति ने जावेद और इरफान मौलाना के माध्यम से सामाजिक दबाव बनाने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी। डरा-धमकाकर केस वापस लेने की कोशिश की जा रही है। यहां तक कि पत्नी के खिलाफ झूठी शिकायतें तक की गईं। इस वजह से याचिकाकर्ता मानसिक पीड़ा से गुजर रही है। उसकी उम्र महज 22 वर्ष है, जिसे उसका 32 साल का पति बुरी तरह परेशान कर चुका है।

Posted By: Brajesh Shukla

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