जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में राज्य सरकार ने जवाब पेश कर बताया कि मेडिकल यूनिवर्सिटी घोटाले की जांच करने के लिए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश केके त्रिवेदी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश रवि विजय कुमार मलिमथ व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने जांच कमेटी को रिपोर्ट पेश करने के लिए एक माह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई नवंबर के अंतिम सप्ताह में निर्धारित की गई है।

मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर में हुए घोटाले की जांच कराने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद मिश्रा और अंकिता अग्रवाल की ओर से जनहित याचिकाएं दायर की गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ, अमिताभ गुप्ता और आरएन तिवारी की ओर से बताया गया कि मेडिकल यूनिवर्सिटी में बड़े पैमाने पर छात्रों को पास कराने के लिए रिश्वत ली गई। पास कराने के लिए छात्रों से आनलाइन रकम ली गई। परीक्षा का काम देख रही माइंड लाजिस्टिक कंपनी ने भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की। परीक्षा कराने वाली कंपनी को ई-मेल भेजकर नंबर बढ़वाए गए। घोटाले को उजागर करने वाले अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया गया।

पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर जांच कराने का आदेश दिया था। सोमवार को अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेन्द्र यादव ने डिवीजन बैंच को बताया कि 14 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज केके त्रिवेदी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। कमेटी में सायबर क्राइम के एडीजी योगेश देशमुख, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुनील कुमार गुप्ता, सीनियर कंसलटेंट एमपीएसईडीसी विरल त्रिपाठी और इंजीनियर टेस्टिंग एएपीएसईडीसी प्रियंक सोनी को समिति को सदस्य बनाया गया है।

Posted By: Ravindra Suhane

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