जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट ने ई-वे बिल की मियाद खत्म होने के साढ़े चार घंटे देरी से ट्रक के मंजिल पर पहुंचने पर स्टेट जीएसटी विभाग द्वारा करदाता पर लगाया गया 6.82 लाख का जुर्माना निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति सुजय पाल व न्यायाधीश प्रकाश चंद्र गुप्ता की युगलपीठ ने कहा कि ये देरी कर चोरी की मंशा से नहीं की गई है। कोर्ट ने जीएसटी अधिकारियों को निर्देश दिए कि पहले से जमा की गई जुर्माने की राशि आवेदक को 30 दिन के भीतर लौटाई जाए। ऐसा न होने पर भुगतान की तिथि तक का छह प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। ई-वे बिल कि मियाद से देरी कर माल पहुंचाने के मामले में विभाग की ओर से लगाया गया जुर्माना निरस्त करने का प्रदेश का यह संभवत: पहला मामला है।

मामले पर सुनवाई के दौरान जीएसटी की ओर से दलील दी गई कि यह देरी टैक्स चोरी की नियत से की गई है। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक ध्यानी ने बताया कि ट्रक की क्लच प्लेट खराब होने के कारण ट्रक को रायपुर से डिंडोरी माल लेकर पहुंचने में केवल साढ़े चार घंटे का अतिरिक्त समय लग गया। ट्रक की रिपेयरिंग की भी जानकारी, बिल आदि विभाग के अधिकारी सहायक आयुक्त को बताया गया, लेकिन ई-वे बिल की मियाद अधिक लगने को विभाग द्वारा टैक्स चोरी मान कर जुर्माना लगा दिया। विभाग द्वारा ट्रक को राजसात कर 24 लाख का जुर्माना वसूलने का नोटिस भी दे दिया गया।

दयाशंकर सिंह को डिंडौरी में एक कालेज में प्रयोगशाला, क्लास रूम बनाने का सरकारी ठेका मिला था। रायपुर से स्टील बुलाने का आर्डर दिया और इसका ई-वे बिल 17 मई को तैयार हुआ। ट्रक माल लेकर 18 मई को निकला, उसे 19 मई की रात 12 बजे तक माल पहुंचाने का ई-वे बिल था। रास्ते में वाहन खराब हो गया, इसे ठीक कर वह वापस रवाना हुआ तो वह 20 मई की सुबह साढ़े चार बजे गंतव्य पर पहुंचा, यहां जांच के दौरान ई-वे बिल देखने पर विभागीय अधिकारियों ने वाहन को रोक लिया और पेनाल्टी लगा दी। मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि जीएसटी एक्ट के तहत प्रदेश में अभी तक ट्रिब्यूनल (अपीलीय अधिकरण) का गठन नहीं किया गया है। इसलिए करदाता के पास हाई कोर्ट आने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।

Posted By: tarunendra chauhan

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