जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाई व मिडिल स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में अलग से अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की मांग नामंजूर कर दी। मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार मित्तल व जस्टिस विज य कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने व्यापमं की आपत्ति पर गौर करने के बाद याचिका खारिज करने का आदेश सुनाया।

याचिकाकर्ता विनोद शर्मा व आशा मिश्रा सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता अंशुमन सिंह, व्यापमं की ओर से अधिवक्ता अमित सिंह व राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेंद्र यादव ने पक्ष रखा।

अतिथि शिक्षक के अनुभव का लाभ चाहिए : याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य के अनुभव का लाभ अपेक्षित है। जब ऑनलाइन फॉर्म जमा किए गए थे, तब अनुभव प्रमाण पत्र पेश नहीं किया जा सका। लिहाजा, वर्तमान में नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान अनुभव प्रमाण पत्र पेश करने की अनुमति प्रदान की जाए।

ऑनलाइन आवेदन के समय क्यों नहीं जमा किया : व्यापमं की ओर से आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ताओं को ऑनलाइन पॅुार्म जमा करते समय अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य का अनुभव प्रमाण पत्र संलग्न करना था। इसके लिए विकल्प दिया गया था। इसलिए काउंसिलिंग प्रक्रिया में अनुभव प्रमाण पत्र पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह आदेश न्यायदृष्टांत की तरह सन्दर्भ बनेगा। इसीलिए इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस आदेश से याचिकाकर्ताओं ने राहत की सांस ली है। विदित हो कि लंबे समय अतिथि शिक्षक अपनी मांग को लेकर परेशान हैं। वे नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।

Posted By: Ravindra Suhane

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