जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सुपर स्‍पेशियलिटी के बाद एक वर्ष की अनिवार्य ग्रामीण सेवा करने की अनुमति दिए जाने की मांग संबंधी याचिका खारिज कर दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव और जस्टिस राजीव कुमार दुबे की युगलपीठ ने साफ किया कि याचिकाकर्ता चिकित्सकों को यह स्वतंत्रता प्रदान की है कि वे पूर्व में भरे गए बांड के बदले 10 लाख रुपये जमा कर अपने मूल दस्तावेज वापस ले सकते हैं।

बुरहानपुर निवासी डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि पीजी डिग्री के करने के पूर्व उनसे एक वर्ष की ग्रामीण सेवा करने के लिए 10 लाख रुपये का बांड भराया गया था, इसके एवज में उनके मूल दस्तावेज जमा कराए गए थे। याचिका में कहा गया कि उन्होंने मास्टर ऑफ सर्जरी का कोर्स पूरा कर लिया है। उनका चयन सुपर स्‍पेशियलिटी कोर्स के लिए हो गया है। सुपर स्‍पेशियलिटी कोर्स में एडमिशन के लिए उनके मूल दस्तावेज वापस नहीं किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे सुपर स्‍पेशियलिटी कोर्स के बाद एक वर्ष की अनिवार्य ग्रामीण सेवा करने के लिए तैयार है, तब तक उनके मूल दस्तावेज वापस दिलाए जाए। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 10 लाख रुपये जमा करने पर मूल दस्तावेज वापस लेने की छूट प्रदान करते हुए याचिका खारिज कर दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुमन सिंह ने पक्ष रखा। जबकि राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता आशीष आनंद बर्नार्ड ने याचिका का विरोध किया।

Posted By: Brajesh Shukla

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