जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट ने राजधानी भोपाल के शासकीय गांधी मेडिकल कालेज में माइक्रोबायोलाजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नाति को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखने के निर्देश दिए। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने इस मामले में मेडिकल एजुकेशन विभाग के प्रमुख सचिव व डायरेक्टर, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, गांधी मेडिकल कालेज के डीन व सीईओ को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।

गांधी मेडिकल कालेज में पदस्थ असिस्टेंट प्रोफेसर डा. प्रियंका सिंह ने याचिका दायर कर बताया कि प्रमोशन में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट कोर्ट को बताया कि उक्त विभाग में तीन पदों पर प्रमोशन होना था। तीनों पदों पर सामान्य उम्मीदवारों को प्रमोशन दे दिया गया। उन्होंने दलील दी कि राज्य सरकार के 2003 के परिपत्र में स्पष्ट है कि प्रमोशन में कितने भी पद हों, रोस्टर का पालन अनिवार्य है अर्थात एससी, एसटी, ओबीसी व सामान्य सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व पूरा होना चाहिए। याचिका में कहा गया कि प्रमोशन देते समय उक्त परिपत्र के प्रविधानों की अनदेखी की गई है।

एलआइसी से बेईमानीपूर्वक चेक हासिल करने पर 10-10 वर्ष का कारावास

जबलपुर । अपर सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह की अदालत ने जीवन बीमा निगम (एलआइसी) से बेईमानीपूर्वक चेक हासिल करने के आरोपित जबलपुर निवासी दिनेश कुलकर्णी, राहुल गर्ग व दीपक सेन को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही जुर्माना भी लगाया। अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक अरविंद जैन ने पक्ष रखा।

उन्होंने दलील दी कि आरोपितों ने दिलीप कुमार राठौर की बीमा पालिसी पर ऋण प्राप्त करने के लिए ऋण आवेदन की कूट रचना की। इसके जरिये एक लाख 50 हजार 190 रुपये का चेक एलआइसी की जिला शाखा से प्राप्त कर लिया। जब इसकी जानकारी दिलीप कुमार राठौर को लगी तो उसने थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच में पाया कि आरोपितों ने मिलीभगत करके फर्जी कागजात तैयारा कराए और इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। अदालत ने सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद दोष सिद्ध पाकर सजा सुना दी।

Posted By: tarunendra chauhan

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