जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट ने दिव्यांग (मूक-बधिर) बालिका से दुष्कर्म के मामले में आरोपित का डीएनए टेस्ट न कराए जाने के रवैये को बेहद गंभीरता से लिया। सतना जिले के कोटर थाने में पदस्थ टीआइ की लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई। इसी के साथ एसपी सतना को निर्देश दिए कि दोषी अधिकारी के खिलाफ आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यही नहीं चार माह के भीतर डीएनए टेस्ट न कराने की गलती सुधारकर ट्रायल कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करने की व्यवस्था दे दी।

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान अवगत कराया गया कि सतना जिले के सिविल लाइंस थानांतर्गत कठवरिया ग्राम निवासी 19 वर्षीय आरोपित जय बच्चन उर्फ राजा ने कोटर थानांतर्गत निवासी नाबालिग दिव्यांग बालिका से दुष्कर्म किया। शिकायत पर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया। इसी मामले में हाई कोर्ट में जमानत की अर्जी पेश की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एफएसएल रिपोर्ट के अवलोकन से पाया कि पीड़िता के कपड़ों में लगे धब्बों और आरोपित के रक्त के डीएनए सैम्पल टेस्ट कराने के लिए भेजे ही नहीं गए। इस पर जमानत अर्जी वापस ले ली गई, लेकिन हाई कोर्ट ने इस बात को गंभीरता से लिया। हाई कोर्ट ने कहा कि मामला दिव्यांग बालिका से दुष्कर्म का है। लिहाजा, एसपी स्वयं आरोपित का डीएनए टेस्ट करवा कर रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करवाएं।

हाई कोर्ट में एक साथ सुनी जाएंगी पेंशनर्स की याचिकाएं

जबलपुर। हाई कोर्ट में पेंशनर्स की याचिकाएं एक साथ सुनी जाएंगी। पेंशनर्स एसोसिएशन, मध्य प्रदेश के अध्यक्ष एचपी उरमलिया ने बताया कि प्रदेश के करीब साढ़े चार लाख पेंशनर्स को छठवें वेतन आयोग का लाभ देने के मामले में हाई कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं। पूर्व में हाई कोर्ट ने मार्च, 2020 में निर्णय दिया था। इसका पालन नहीं होने पर संगठन ने अवमानना याचिका दायर की थी। इस शासन ने एक रिव्यू याचिका दायर की। अवमानना सहित करीब दो दर्जन याचिकाओं पर अब एक साथ नियमित बेंच सुनवाई करेगी।

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