जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पंचायत चुनाव के आरक्षण को कठघरे में रखे जाने के मामले में राज्य शासन को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। जवाब को रिकार्ड पर लेने के साथ ही स्थगन के आवेदन पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा। यह व्यवस्था विभिन्न याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई करते हुए दी गई है।

आरक्षण प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा : मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली युगलपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता सिंगरौली निवासी रामसुजान साकेत व नरेंद्र दि्वेदी की ओर से अधिवक्ता ब्रहमेंद्र पाठक, सीधी निवासी छोटेलाल चर्मकार की ओर से अनूप सिंह व दमोह निवासी रामलाल महोबिया की ओर से सौरभ सिंह ठाकुर खड़े हुए। उन्होंने दलील दी कि पंचायत चुनाव में आरक्षण प्रक्रिया का नियमानुसार पालन नहीं किया जा रहा है। पंचायत निर्वाचन नियम-1995 में प्रविधानित है कि जिस वर्ग को पूर्व में वार्ड या पंचायत आरक्षण का लाभ मिला था, आगामी निर्वाचन में उस वर्ग को छोड़कर लाटरी द्वारा आरक्षण किया जाएगा। इसके बावजूद वर्तमान में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। लिहाजा, आरक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए। ऐसा इसलिए भी क्योंकि हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच इस तरह के मामलों में स्थगन आदेश पारित कर चुकी है। हाई कोर्ट ने बहस सुनने के बाद राज्य शासन को अपना जवाब पेश करने दो सप्ताह का समय दे दिया। बहस के दौरान दलील दी गई कि सरकार का रवैया मनमाना है। इससे पंचायत चुनाव की शुचिता भंग हो रही है। ऐसे में नए सिरे से विधिवत आरक्षण की व्यवस्था अनिवार्य है। ऐसा न होने पर चुनाव की मूलभूत मंशा कठघरे में चली जाएगी।

Posted By: Brajesh Shukla

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