जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नगर निगम स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में भी टाप-10 से दूर रहा। अब जब 2022 के लिए स्वच्छता की परीक्षा शुरू हो गई है उसमें भी सफाई व्यवस्था बद्हाल ही है। शहर के 79 वार्डों में 38 वार्डों की सफाई व्यवस्था ठेके पर दी गई है, जबकि 41 वार्डों में सफाई का जिम्मा खुद नगर निगम ने संभाल रखा है। बावजूद इसके अधिकांश वार्डों में अब भी न तो ढंग से झाडू लग रही है न घरों से रोजाना कचरा उठाने के लिए कचरा वाहन पहुंच रहे हैं। यदि स्वच्छ सर्वेक्षण के दौर में ऐसे ही ढिलाई बरती गई तो इस बार भी शहर को मुंह की खानी की पड़ सकती है। क्योंकि सफाई के बिगड़े हालात हम नहीं बल्कि नागरिक अब खुद साझा कर कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इन कमियों को दूर लिया गया तो जबलपुर भी इंदौर की तरह स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

वार्ड नंबर 72 में ऐसे है सफाई के हाल: यहां के नागरिकों ने बताया कि वार्ड क्रंमाक 72 कचनार सिटी फेस टू श्रीराम पार्क के आस-पास सफाई व्यवस्था बेहद खराब है। सफाई कर्मचारी यहां की सफाई करने पहुंचते ही नहीं है। कचरा गाड़ी भी घरों से कचरा लेने नहीं आती। जिसके कारण जहां-तहां कचरा, गंदगी बिखरी पड़ी है। नाले-नालियों की सफाई भी नहीं हुई है, आस-पास बड़ी-बड़ी झाडि़यां, पौधे उग आए हैंं। जिसके कारण जहरीले जीव-जंतुओं के खतरा बना रहता है। इतना ही नहीं नागरिकों का कहना है कि यहां अभी तक विकास भी नहीं पहुंचा है। नागरिकों के आवागमन के लिए ढंग की सड़क तक नही बनाई गई है। यहीं हाल शहर के अन्य वार्डों के भी है।

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सफाई कर्मियों में नहीं सामंजस:

- सफाई में सुधार लाने के लिए नगर निगम पैसा और पसीना तो बहा रहा है। लेकिन अपेक्षाकृत सुधार नहीं आ रहा है। क्योंकि सफाई कर्मियों में आपसी सामंजस का अभाव है।

- इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गली-मोहल्लों में सड़क पर झाडू लगाने, कचरा उठाने वाले सफाई कर्मचारी नालियों से निकले कचरा, मलबे को नही उठाते। उनका कहना है कि ये कचरा, गंदगी वहीं सफाई कर्मी उठाएंगे जिन्होंने नाली से कचरा निकाला है।

- नालियों से निकालकर बाजू में ही ढेर लगा दिया जाता है जो चार -पांच दिनों तक पड़ा रहता है। जब वे चाहेंगे तभी कचरा गंदगी उठेगी। इस संबंध में सफाई कर्मियों से चर्चा कर उनमें सामंजस लाने के प्रयास किए जाने चाहिए।

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प्रशिक्षण की भी दरकार: शहर को इंदौर की तर्ज पर स्वच्छता में पहला मुकाम हासिल करने के लिए सफाई कर्मियों, कचरा वाहन चालक, परिचालकों को प्रशिक्षत भी किया जाना चाहिए। ताकि इंदौर की तर्ज पर कचरा वाहनों में अलग-अलग तरह के गीले-सूखे कचरे का संग्रह हो और उसका उपयोग खाद, बिजली व अन्य सामग्री बनाने में किया जा सका।

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- संसाधनों की नहीं कोई कमी

- 200 से ज्यादा है कचरा गाडि़यां

- 3000 है सफाई कर्मचारी

- 79 वार्ड में है एक-एक सुपरवाइजर

-16 जोन में एक-एक मुख्य स्वच्छता अधिकारी है पदस्थ्य

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क्या कहते है नागरिक- वार्ड क्रंमाक 72 में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। कचरा गाड़ी नहीं आती, झाडू भी नहीं लगती। ऐसे में हम स्वच्छ सर्वेक्षण में अव्वल आने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? सभी वार्डों में सफाई की सघन निगरानी की जानी चाहिए।

दीपक ठाकुर, नागरिक

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स्वच्छ सर्वेक्षण चल रहा है। पर अधिकांश वार्डों में रोजाना कचरा नहीं उठ रहा है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में भी जबलपुर टाप 20 में ही रहेगा।

एनआर पांडे, नागरिक

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शहर में सफाई व्यवस्था में कसावट लाने के लिए सफाई कर्मी व कचरा वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है। तभी सफाई में निखार आ पाएगा। हम भी इंदौर की तरह सफलता हासिल करने में सक्षम है।

अंकुर पति त्रिपाठी, नागरिक

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मैं हूं स्व्च्छता प्रहरी:

सफाई के प्रति गंभीर होना हर समाजिक नागरिक का कर्तव्य है। मुझे सफाई पंसद है इसलिए घर व आस-पास गंदगी नहीं होने देता। मेरा यही प्रयास होता है सब स्वच्छ रहे, स्वस्थ्य रहे। इसके लिए जरूरी है न गंदगी करे न दूसरों को करने दें।

सीके जैन, नागरिक

Posted By: Ravindra Suhane

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