जनता के रखवाले : रामकृष्ण परमहंस पांडेय : कोरोना काल में विवादों में आए शहर के एक निजी अस्पताल के डायरेक्टर ने फर्जीवाड़ा करने का फरमान जारी किया है। यह फर्जीवाड़ा नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फार हास्पिटल्स एंड हेल्थ केयर यानि राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) के नाम पर कराया जा रहा है। इसी माह के दूसरे सप्ताह एनएबीएच की टीम अस्पताल का दौरा करने वाली है। अस्पताल में हजारों मरीजों की फाइलों में डाक्टरों के नोट्स अधूरे हैं। उदाहरण के लिए मरीज का आपरेशन हो गया परंतु फाइल पर मेडिकल व प्री एनेस्थीसिया चेकअप के नोट्स ही नहीं डले। डायरेक्टर के फरमान तमाम डाक्टर अधूरी फाइलों को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। परंतु कुछ डाक्टर पशोपेश में हैं। जब मरीज देखा ही नहीं फिर दस्तावेजों पर कलम कैसे चलाएं। उन्हेें अब अस्पताल से निकाला जा रहा है। वे कहते हैं कि पूंछ सीधी नहीं होगी। बता दें कि एनएबीएच किसी अस्पताल की गुणवत्ता के लिए उच्चतम मापदंड का मानक है।

सोने की डकैती में मालामाल हुए पहरेदार-

मणप्पुरम गोल्ड लोन कंपनी में दिनदहाड़े डकैती हुई थी। घटना कटनी जिले में नवंबर 2022 की है। पांच नकाबपोश बदमाश करोड़ों का सोना तथा लाखों की नकदी ले उड़े थे। कई जिले की पुलिस टीमें डकैतों की तलाश में जुटी थीं। कुछ डकैत पकड़े गए जो जेल की हवा खा रहे हैं। डकैतों ने सोने को ठिकाने लगाने के लिए सार्वजनिक परिवहन की बस नहीं बल्कि कार का इस्तेमाल किया गया था। छत्तीसगढ़ के रास्ते सोने की खेप को बिहार ले जाया गया था। परंतु करोड़ों का माल अब तक पुलिस बरामद नहीं कर पाई। खुफिया सूत्रों को पता चला है कि कई पहरेदार सोने की डकैती में मालामाल हो गए हैं। इनमें से बड़े ओहदे वाले दो साहबों ने अच्छा हाथ मारा है। एक ने तो हिस्से में आई संपत्ति को गृहनगर पहुंचा दिया। कुल मिलाकर सोना अब नहीं मिलने वाला। बैंक वाले इसलिए खामोश हैं क्योंकि उन्हें बीमा का लाभ मिल जाएगा।

जीआरपी से ऐसा लगाव, जाना ही नहीं चाहते-

खाकी पहनने वाले ज्यादातर अधिकारी व जवान फील्ड की नौकरी चाहते हैं। पुलिस की किसी अन्य शाखा में हैं तो जिला बल में जाने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाते रहते हैं। परंतु जीआरपी यानि शासकीय रेल पुलिस खाकी के इस मिथक को तोड़ रही है। कुछ अधिकारियों व जवानों का जीआरपी से ऐसा लगाव हो गया है कि वे अब कहीं और जाना ही नहीं चाहते। कोई इंटेलीजेंस के नाम पर वर्षों से कुर्सी तोड़ रहा है तो कोई किसी कार्यालय में डटा है। निरीक्षक से लेकर राजपत्रित अधिकारियों की बात करें तो इनमें से कुछ 6-12 साल से जीआरपी जबलपुर में ही पदस्थ हैं। लंबे समय से कुंडली मारे बैठे ये अधिकारी रेल यात्रियों व विभाग के लिए फायदेमंद साबित नहीं हो पा रहे। जवानों में चर्चा है कि साहब, मैडम लोगों की विदाई कब होगी। पर वे खुश भी हैं कि जब साहब लोग टिके हैं तो उन्हें तबादले का डर क्यों।

एक के जाते ही दो नंबर पर आ गए-

राजस्व मोहकमे से एक अधिकारी की विदाई हुई। 2022 में हुए तबादले के बाद 2023 में वे नवीन पदस्थापना स्थल पर पहुंच पाए। कर्मचारियों में चर्चा है कि एक साहब के जाते ही सीएम हेल्प लाइन में दो नंबर पर आ गए। उनका यह कहना कतई नहीं है कि वे साहब ही सीएम हेल्प लाइन को एक नंबर पर ले आए थे, परंतु अधीनस्थों से तालमेल बनाकर चलने का उनमें हुनर था। हाल ही में गणतंत्र दिवस का समारोह गरिमामय ढंग से मनाया गया। वीआइपी व वीवीआइपी की पहचान में सुरक्षा में तैनात जवानों व अधिकारियों ने इज्जत बचाई। वीआइपी व वीवीआइपी की पहचान करने में जिम्मेदार असफल रहे। राजस्व कर्मचारी कहते हैं कि साहब को कोई समझाए कि वीसी कम करें, अधीनस्थों पर भरोसा करें। चाटुकारों से दूर रहें। जिला फिर से एक नंबर पर आ जाएगा। और नए-नए रिकार्ड बनेंगे।

Posted By: Dheeraj Bajpaih

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