जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। खनिज विभाग ने बेलखेड़ा अंतर्गत नर्मदा के झलौन घाट पर जिस पोकलेन मशीन को जब्त कर छोड़ दिया था, रात भर उसी से रेत का अवैध खनन किया जाता रहा। सुबह होते ही पोकलेन को यथावत जब्ती स्थल पर लावारिस छोड़ दिया जाता था ताकि किसी को संदेह न होने पाए। सूत्रों की माने तो रेत के अवैध खनन में इस मशीन के उपयोग में पाटन एसडीओपी रहे एसएन पाठक का सीधा हाथ था। रेत का अवैध खनन रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग को भी इस कारनामे की जानकारी थी, लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे रहे। इधर, गुस्र्वार रात पाठक और आरक्षक जाट के बयान दर्ज किए गए। संभवत: शुक्रवार को प्राथमिक जांच रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को सौंप दी जाएगी।

कई पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध

एसडीओपी रहे पाठक की शह पर चल रहे रेत के अवैध कारोबार में कई पुलिसकर्मियों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस अधिकारियों तक जो जानकारी पहुंच रही है उसके अनुसार एसएन पाठक के इशारे पर कई थानों के पुलिसकर्मी व अधिकारी इस धंधे में लिप्त हो गए थे। अपराधों की रोकथाम और अपराधियों की पतासाजी का मूल काम छोड़कर पुलिस रेत के खनन, परिवहन, भंडारण का लेखाजोखा करती रही। बताया जाता है कि संदिग्ध भूमिका वाले पुलिस कर्मियांे के खिलाफ भी जांच की जा सकती है।

अन्य विभागों की नजर में रेत कांड

भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए जिम्मेदार अन्य विभाग रेत कांड की जांच में कूद सकते हैं। बताया जा रहा है कि अमित अग्रवाल ने जांच अधिकारी के समक्ष दिए गए बयान में रेत के अवैध खनन से जुड़ी कई बातों को उजागर किया है। जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि नदियों को छलनी करने में अकेले पाठक की भूमिका नहीं थी, अन्य जिम्मेदार विभाग के अधिकारी व कर्मचारी कार्रवाई न कर रेत चोरी को बढ़ावा दे रहे थे। ऐसे सभी लोगों पर जांच एजेंसियों की नजर है।

एक पक्षीय कार्रवाई के भय से अंतिम दिन बयान देने पहुंचे

निलंबित आरक्षक देवेन्द्र जाट और एसडीओपी रहे पाठक एक पक्षीय कार्रवाई के भय से जांच के अंतिम दिन रात में बयान दर्ज कराने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। जांच अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संजीव उइके के कक्ष में दोनों ने बयान दर्ज कराए। एएसपी ने बताया कि दोनों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया गया था। बयान दर्ज कराने में दोनों की हीलाहवाली के कारण पुलिस अधीक्षक ने एक पक्षीय कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इधर, पुलिस अधीक्षक अमित सिंह ने निर्देश दिया है कि प्राथमिक जांच पूरी होते ही पाठक और जाट के खिलाफ विभागीय जांच संस्थित की जाए।

पाटन एसडीओपी रहे एसएन पाठक और निलंबित आरक्षक देवेन्द्र जाट बयान दर्ज कराने उपस्थित नहीं हुए। दोनों को नोटिस जारी किया जा चुका है। बयान न देने पर दोनों के विस्र्द्ध एक पक्षीय कार्रवार्ई के निर्देश पुलिस अधीक्षक ने दिए हैं। - डॉ. संजीव उइके, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक साउथ

Posted By: Prashant Pandey

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