जबलपुर नईदुनिया प्रतिनिधि।रेलवे स्टेशन और ट्रेन में यात्रियों को गुणवत्तायुक्त और निर्धारित मात्रा में भोजन देने का दावा करने वाला रेलवे विभाग अब तक इस पर खरा नहीं उतर पाया है। हकीकत यह है कि यात्रियों से मिलने वाली शिकायतों में सबसे ज्यादा खाना की गुणवत्ता, मात्रा, दाम और वेंडर की व्यवहार को लेकर होती हैं। इस शिकायतों को दूर करने के लिए जबलपुर रेल मंडल का कामर्शियल विभाग और आरपीएफ लगातार अभियान चलाता है तो कभी औचक कार्रवाई कर इन पर लगाम लगता है। इसके बावजूद मौजूदा हकीकत यह है कि जनवरी से नवंबर तक जबलपुर रेल मंडल में आरपीएफ ने 5 हजार 344 अवैध वेंडर पकड़े गए।

जुर्माना भरने के बाद यह सब छूट गए और दोबारा अवैध वेंडर बनकर स्टेशन और ट्रेन में खाना बेच रहे हैं। इधर, कामर्शियल विभाग ने अवैध वेंडर पर शिकंजा कसने के लिए वैध वेंडर को बार कोड वाले आइकार्ड दिए, ताकि मौके पर ही उन्हें स्कैन पर वेंडर की वैधता को जांचा जा सके। इसका भी असर नहीं हुआ। सख्ती के आदेश, फिर भी असर नहीं रेलवे बोर्ड से लेकर आरपीएफ के डीजी तक ने अवैध वेंडरों को लेकर सख्त कार्रवाई करने तक के निर्देश दिए हैं। इसका असर भी देखा गया, लेकिन सिर्फ तब तक, जब तक अभियान चलाकर कार्रवाई की गई। हकीकत यह है कि आने वाले कुछ सालों में अवैध वेंडर की संख्या में इजाफा हुआ है। इनसे न सिर्फ यात्रियों का खतरा है, बल्कि यह रेलवे और आरपीएफ, दोनों के लिए खतरा और चुनौती बने हुए हैं। जबलपुर मंडल में ही पकड़े गए लगभग पांच हजार अवैध वेंडर इसका स्पष्ट उदाहरण हैं।वैध और अवैध वेंडर क्यावैध- रेलवे द्वारा रेलवे स्टेशन और ट्रेन में जिन व्यक्ति को खाना बेचने और खाना पहुंचाने के लिए अधिकृत जिम्मेदारी दी गई है। रेलवे द्वारा वैध वेंडर का परिचय पत्र बनाकर उनका मेडिकल और पुलिस वैरीफिकेशन कराया जाता है।

अवैध- जिन्हें खाना बेचने और सप्लाई करने की अधिकृत जिम्मेदारी नहीं है। इसके बावजूद यह खाना बेचते हैं और यात्रियों से दुर्व्यवहार भी करते हैं। अवैध वेंडर से वसूला 46 लाख का जुर्मानाआरपीएफ जबलपुर मंडल द्वारा एक साल में पकड़े गए 5344 अवैध वेंडरों को गिरफ्तार कर इनसे लगभग 46 लाख 24 हजार 248 जुर्माना वसूला गया। इसके लिए आरपीएफ ने 40 टीम बनाई।

इन्होंने इटारसी-पिपरिया खण्ड में 711 अवैध वेंडर पकड़े, कटनी-जबलपुर खण्ड में 1270 अवैध वेंडर और न्यू कटनी-सिंगरौली खण्ड में 130 अवैध वेंडर पकड़े। वहीं दमोह-सागर खण्ड में 309 अवैध वेंडर, मैहर-कटनी खण्ड में 347 अवैध वेंडर और जबलपुर-नरसिंहपुर खण्ड में 1448 अवैध वेंडर पकड़े गए।

क्या है दिक्कत : रेलवे से जुड़े जानकारों का कहना है कि अवैध वेंडर पर की जाने वाली कार्रवाई सख्त नहीं है। इसकी वजह रेलवे अधिनियम है। दरअसल, अवैध वेंडर को पकड़ने के बाद अधिकतम 5 हजार रुपये का जुर्माना और सजा का प्रविधान है, लेकिन इसमें से सिर्फ जुर्माना ही होता है, सजा नहीं। इस वजह से अवैध वेंडर जुर्माना देकर बारी हो जाते हैं और फिर वापस अवैध वेंडर का काम करते हैं। इनका पुलिस वैरीफिकेशन न होने की वजह से कई अवैध वेंडर ट्रेन में चोरी और लूटपाट की घटना को अंजाम देते हैं, जो यात्रियों के खतरा हैं।

यात्रियों को हो रहा नुकसान- अवैध वेंडर ज्यादातर ट्रेन में पान-गुटका, सिगरेट के अलावा आमलेट, बिरयानी, चाय, खाना सप्लाई करते हैं।- अवैध वेंडर चलाने का काम कई लोगों ने ठेके पर ले रखा है, जो इनके लिए ट्रेन-रूट तय करते और बदले में शुल्क वसूलते हैं।

- अवैध वेंडर द्वारा बेचे जाने वाले खाने की गुणवत्ता पर निगरानी नहीं होती, जिससे कई यात्री जहरखुरानी का शिकार होते हैं।

- अवैध वेंडर में कई अपराधी प्रवृत्ति के लोग भी होते हैं, जो यात्रियों से झड़प कर उनके साथ चाकूबाजी-लूटपात करते हैं।

इनका कहना है

अवैध वेंडर को पकड़ने के लिए कामर्शियल विभाग समय-समय पर अभियान चलाता है। वहीं मंडल में लगभग 7 सौ वैध वेंडर है, जिसे बारकोड आइकार्ड दिए हैं। बारकोड स्कैन कर मौके पर ही वैध वेंडर से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है।विश्वरंजन- सीनियर डीसीएम, जबलपुर मंडल

इनका कहना है

आरपीएफ ने जनवरी से नवंबर माह तक 40 टीम की मदद से अभियान चलाकर अवैध वेंडर को पकड़ा। इस दौरान पांच हजार 344 अवैध वेंडर पकड़े गए, जिससे आरपीएफ ने लगभग 46 लाख 24 हजार 248 जुर्माना वसूला गया। अरुण त्रिपाठी, सीनियर डीएससी, आरपीएफ जबलपुर

Posted By: Rajnish Bajpai

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