जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिला न्यायालय जबलपुर के प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश नवीन कुमार सक्सेना के न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में साफ किया कि ससुराल पक्ष को दोषी साबित करने के लिए दहेज की मांग व क्रूरता प्रमाणित होना जरूरी है। न्यायालय ने इस मत के साथ कोर्ट ने आनंद नगर निवासी उजमा फरहीन की वह अपील को निरस्त कर दी जिसके जरिये अधीनस्थ न्यायालय के निर्णय को चुनौती दी गई थी। प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश के न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि अधीनस्थ न्यायालय ने अपीलार्थी के पति मोहम्मद तारिक व जेठ मोहम्मद आरिफ को दहेज प्रताड़ना के मामले में दोषमुक्त कर दिया था।

अनावेदकों की ओर से अधिवक्ता संदेश दीक्षित ने दलील दी कि अपीलार्थी ने दहेज में दो लाख रुपये और लगेज वाहन की मांग का झूठा आरोप लगाया था। उन्होंने तर्क दिया कि अभियोजन द्वारा पेश की गई कहानी से दो गवाहों की गवाही मेल नहीं खाती। इसके अलावा एफआइआर में दर्ज एक गवाह की गवाही भी नहीं कराई गई। अपीलार्थी ने पति और जेठ पर मारपीट का आरोप लगाया था, लेकिन मेडिकल जांच में कोई चोट नहीं मिली थी। जब मामला परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा, उसके बाद ही उजमा ने एफआइआर दर्ज कराई थी। इस तरह यह पूरा मामला दुर्भावना से प्रेरित था। इसीलिए अधीनस्थ न्यायालय ने दोषमुक्ति का निर्णय पारित किया था। चूंकि वह निर्णय विधिसम्मत था, अत: अपील निरस्त किए जाने योग्य है। प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश के न्यायालय ने तर्क से सहमत होकर अपील निरस्त करने का आदेश सुना दिया।

टैटू व्यवसायी के हत्यारों को आजीवन कारावास:

विशेष न्यायाधीश सुखराम सीनम के न्यायालय ने टैटू व्यवसायी को सरेराह गोली मारकर मौत के घाट उतारने के आरोपित जबलपुर निवासी मयंक, शिवम व उत्कर्ष को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। साथ ही 12-12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अभियोजन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी कृष्णा गोपाल तिवारी ने पक्ष रखा। उन्हाेंने दलील दी कि 12 अगस्त, 2020 को मृतक अंकित चंडोक रात्रि 11 बजे अपने घर से स्कूटी से शारदा मंदिर रोड में गाय को चारा व सब्जी खिलाने गया था। इसी दौरान सड़क पर पीछे से वैन में बैठे आरोपितों ने स्कूटी में टक्कर मार दी। इससे अंकित गिर गया। इसी दाैरान आरोपितों ने उसे गोली मार दी। गढ़ा पुलिस ने अपराध कायम किया।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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