जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि।

जिले में कहने को ढाई से तीन लाख किसान हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश को एक प्लेटफार्म पर जोड़ा नहीं जा सका। इसके लिए केंद्र सरकार की एफपीओ नीति यानी फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (किसान उत्पादक संगठन) तैयार किया जाना है। यह कार्य जिले में कई महीनों से लंबित है। अब जाकर जिला प्रशासन, कृषि, उद्योग विभाग सहित उद्यानिकी, पशुपालन जैसे विभागों ने काम प्रारंभ किया है। वर्तमान में किसानों के पांच समूहों का पंजीयन कार्य किया जा रहा है। इनमें से सिर्फ एक समूह ने ही डेढ़ सौ किसानों के लिए पंजीयन का आवेदन जमा किया है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कोविड संक्रमणकाल की वजह से यह कार्य समय रहते प्रारंभ नहीं किया जा सका।

अब जुटे विभाग

- प्रशासनिक स्तर पर जिला पंचायत सीईओ द्वारा पहली बार संबंधित विभागों की बैठक ली गई थी। जिसमें आगामी रणनीति पर चर्चा हुई। जिले की सभी तहसील, जनपद व ग्राम पंचायत स्तर पर किसानों द्वारा उत्पादित उपज, फलों, सब्जी के अलावा हर तरह की उपज के लिए अलग-अलग संगठन तैयार करने पर चर्चा हुई। लेकिन आज भी किसानों के सभी संगठनों को इस काम में सहभागिता के लिए नहीं जोड़ा गया।

यह है केंद्र की नीति

उत्पादकों, विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों का उत्पादक संगठन बनाना है। कृषि से जुड़ी अनेक चुनौतियों का सामना करने तथा निवेश, प्रौद्योगिकी एवं आदान तथा बाजार तक पहुंच में सुधार के लिए यह प्रभावी माना गया। कृषि और सहकारिता विभाग, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार ने कंपनी अधिनियम, 1956 के विशेष प्रावधानों के अंतर्गत पंजीकृत किसान उत्पादक संगठनों को सबसे उपयुक्त संस्थानिक स्वरूप के रूप में चि-त किया है। जिसके इर्द गिर्द किसानों को संगठित किया जाएगा तथा उनकी उत्पादन एवं विपणन क्षमता का सामूहिक रूप से लाभ उठाने के लिए उनकी क्षमता प्रभावी बनाया जाना है। केंद्र व राज्य सरकार की मदद से किसानों के हर तरह के उत्पादन समूहों को सीधे निजी व सरकारी बाजार से जोड़ने का प्रयास है। जिससे सभी किसानों की आय को बढ़ाया जा सके और किसान स्वयं प्रोड्यूस यानी उत्पादन के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।

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जिले में किसान उत्पादक संग्ाठनों को तैयार करने से जुड़े प्रयास धीमे हैं। इस पर अभी बहुत काम करने की जरूरत है। प्रचार-प्रसार का अभाव भी देखने मिला है।

-राघवेंद्र पटेल, भारतीय किसान संगठन

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कोविड की वजह से इस योजना पर काम धीमी गति से हो पाया। अब हर पंद्रह दिनों में बैठक होगी और ज्यादा समूहों को तैयार किया जाएगा।

-एसके निगम, उप संचालक कृषि

Posted By: Brajesh Shukla

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